ब्राह्मणां दा नाला: लाइटों की चकाचौंध और पानी के बीच धड़ल्ले से अवैध खनन; अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल
- बेखौफ खनन: हिमाचल प्रदेश की खन्नी पंचायत के ब्राह्मणां दा नाला में उफनती खड्ड के बीचों-बीच पोकलैंड, जेसीबी और ट्रैक्टरों से दिन-रात अवैध खनन जारी।
- अधिकारियों का रवैया: स्थानीय निवासियों का आरोप—डीएसपी और एसएचओ फोन नहीं उठाते, बात होने पर सीमा विवाद (क्रॉस बॉर्डर) का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ते हैं।
- प्रशासन से सवाल: मानसून के दौरान वैध खनन पर रोक के बावजूद क्रशरों तक भारी मात्रा में कच्चा माल कहाँ से पहुँच रहा है?
पठानकोट / हिमाचल सीमा:हिमाचल प्रदेश की खन्नी पंचायत के अंतर्गत आने वाले ब्राह्मणां दा नाला में अवैध खनन का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। मानसून के इस मौसम में जहाँ नदियाँ और खड्ड उफान पर हैं, वहीं जान-माल के खतरे को दरकिनार कर बेखौफ माफिया पोकलैंड और भारी मशीनों के जरिए खड्ड के पानी के बीचों-बीच से खनन कर रहा है।
ताजा फुटेज के अनुसार, 14 तारीख के बाद 17 तारीख की आधी रात 2:05 बजे भी माफिया की भारी मशीनें खड्ड में गरजती हुई पाई गईं। गाड़ियों और पोकलैंड की लाइटों की चकाचौंध ने आधी रात को भी दिन जैसा माहौल बना रखा था।
स्थानीय लोगों में आक्रोश और पुलिस की अनदेखी:
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि उन्होंने अवैध खनन में लिप्त लोगों के नाम—जो खन्नी, चुगवान, नतियागे और पंजाब के बताए जा रहे हैं—प्रशासन और पुलिस को सौंपे हैं। इसके बावजूद कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है।
”हम बार-बार वीडियो भेजते हैं और शिकायतें करते हैं, लेकिन न तो डीएसपी साहब फोन उठाते हैं और न ही एसएचओ। माइनिंग विभाग के अधिकारी भी फोन रिसीव नहीं करते।”
— बशीर खान (स्थानीय निवासी)
जब भी अधिकारियों से संपर्क होता है, तो वे अंतरराज्यीय सीमा (Cross-Border Issue) का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
अहम प्रशासनिक सवाल:
- मानसून के मौसम में जब पूरे राज्य में वैध खनन पूरी तरह से बंद है, तो पंजाब और हिमाचल के क्रशरों तक कच्चा माल किस आधार पर पहुँच रहा है?
- क्रशर मालिक किस आधार पर अपना रिटर्न दाखिल कर रहे हैं और माइनिंग विभाग इसकी जाँच क्यों नहीं कर रहा?
- क्या दो राज्यों की सीमा का बहाना बनाकर पुलिस और संबंधित विभाग अपनी प्राथमिक जिम्मेदारियों से मुँह मोड़ सकते हैं?













