गांधी चौक में ट्रैफिक नियमों की उड़ी धज्जियां: चालान के बाद भी बेखौफ खड़े हो रहे टू-व्हीलर्स
पठानकोट:शहर का हृदय स्थल और जीवन रेखा माने जाने वाला गांधी चौक इन दिनों गंभीर यातायात और अनधिकृत पार्किंग की समस्याओं से जूझ रहा है। गांधी चौक, जहाँ न केवल पंजाब बल्कि पड़ोसी राज्यों हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से भी भारी संख्या में लोग खरीदारी और व्यापार के लिए आते हैं, वहाँ अव्यवस्थित यातायात के कारण आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पीली रेखा (Yellow Line) को ताक पर रख कर पार्किंग
डाकघर और मुख्य बाज़ारों के बाहर सड़क पर खींची गई पीली रेखा (येलो लाइन) के नियमों का सरेआम उल्लंघन किया जा रहा है। दोपहिया वाहनों को बिना किसी डर के सड़क के बीचों-बीच और पीली रेखा के बाहर पार्क कर दिया जाता है। आधी सड़क पर वाहनों का कब्जा हो जाने के कारण पैदल चलने वालों के साथ-साथ दोपहिया व चार पहिया वाहनों की आवाजाही ठप हो जाती है और घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है।
अतिक्रमण और रेहड़ी-फड़ियों का जमावड़ा
सब्जी मंडी और फल विक्रेताओं के लिए निर्धारित स्थान होने के बावजूद, मुख्य सड़कों और बाज़ारों के मोड़ पर ही अवैध रूप से रेहड़ी-फड़ियां लगा दी जाती हैं। लोग सड़क पर ही वाहन खड़े करके खरीदारी करने लगते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है।
प्रशासन की कार्रवाई बेअसर
ट्रैफिक पुलिस और ट्रैफिक इंचार्ज ब्रह्मदत्त जी द्वारा समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर चालान काटे गए हैं और रेहड़ी-फड़ियों को हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके बावजूद स्थिति में कोई स्थायी सुधार नहीं दिख रहा है। चालान कटने के तुरंत बाद वाहन चालक और विक्रेता फिर से उसी स्थान पर काबिज़ हो जाते हैं।
स्थानीय युवाओं व निवासियों की राय
बातचीत के दौरान स्थानीय युवा योगीवीर ने बताया कि बाज़ार में यातायात का दबाव इतना अधिक है कि अपनी बाइक निकालना भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है। रोज़ाना जाम में फंसने से लोगों का समय और ऊर्जा दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
स्थायी समाधान की माँग
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि जब तक शहर में वाहनों के लिए एक अलग और समर्पित पार्किंग ज़ोन नहीं बनाया जाता, तब तक इस विकट समस्या से निजात मिलना मुश्किल है। प्रशासन को जल्द से जल्द ठोस और स्थायी कदम उठाने होंगे ताकि गांधी चौक की व्यवस्था सुधारी जा सके और किसी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके।












