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AMI News: लाल किले पर गूंजा ‘वंदे मातरम’: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर रचा गया नया इतिहास

लाल किले पर गूंजा ‘वंदे मातरम’: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर रचा गया नया इतिहास

​राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लाल किले पर पहली बार प्रस्तुत की गई विशेष धुन; पीएम मोदी ने 13वीं बार फहराया तिरंगा

​80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर देश की राजधानी दिल्ली स्थित लाल किले के प्रांगण में एक नया इतिहास रचा गया। इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पहली बार लाल किले से ‘वंदे मातरम’ का गायन और इसकी विशेष धुन का वादन किया गया।

​राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस भव्य समारोह में देशभक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिला। लाल किले की प्राचीर पर फूलों की विशेष सजावट की गई थी, जिसके केंद्र में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा सुशोभित था और उसके दोनों ओर हिंदी में “वंदे मातरम” लिखा गया था।

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13वीं बार देश को किया संबोधित

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़े सुरक्षा घेरे और देशभक्ति के उत्साह के बीच लाल किले से देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व किया। पीएम मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 13वीं बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया और राष्ट्र को संबोधित किया।

​समारोह के दौरान वहां मौजूद विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में सैन्य बैंड (Army Band) ने ‘वंदे मातरम’ की मधुर धुन बजाई, जिसके साथ सभी उपस्थित लोगों ने राष्ट्रीय गीत का गायन किया। इसके पश्चात प्रधानमंत्री द्वारा ध्वजारोहण किया गया और राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया।

​“आज लाल किले की प्राचीर से पहली बार ‘वंदे मातरम’ की गूंज सुनाई दे रही है। जब देश ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष मना रहा हो, तो इससे अधिक उपयुक्त और गौरवशाली अवसर दूसरा नहीं हो सकता।”

— प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

​‘वंदे मातरम’ का ऐतिहासिक सफर: एक नज़र में

  • ​रचना एवं प्रकाशन: ‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी (चट्टोपाध्याय) द्वारा वर्ष 1875 में की गई थी। यह पहली बार 7 नवंबर, 1875 को साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित हुआ था।
  • ​‘आनंदमठ’ में समावेश: शुरुआत में स्वतंत्र रूप से लिखे गए इस गीत को बंकिम चंद्र चटर्जी ने बाद में वर्ष 1882 में प्रकाशित अपने प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया।
  • ​पहला सार्वजनिक गायन: वर्ष 1896 में कलकत्ता (अब कोलकाता) में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार ‘वंदे मातरम’ गाया था।
  • ​राष्ट्रीय गीत का दर्जा: स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों का मुख्य नारा बने इस गीत को वर्ष 1950 में संविधान सभा द्वारा भारत के ‘राष्ट्रीय गीत’ (National Song) के रूप में स्वीकार किया गया।
  • ​150वीं वर्षगांठ समारोह: केंद्र सरकार द्वारा पिछले वर्ष नवंबर महीने से ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में साल भर चलने वाले विशेष समारोहों की शुरुआत की गई थी।
Ami News
Author: Ami News

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