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AMI News: रावी नदी उफान पर, मकोड़ा पत्तन पर नाव सेवा ठप, आधा दर्जन गांवों का संपर्क टूटा

पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश से रावी नदी उफान पर; मकोड़ा पत्तन पर नाव सेवा बंद, आधा दर्जन गांवों का संपर्क कटा

  • ​सुरक्षा के मद्देनजर रोका गया किश्ती का संचालन
  • ​छात्रों, किसानों और दैनिक मजदूरों की आवाजाही ठप
  • ​आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना बनी बड़ी चुनौती

​गुरदासपुर: पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही लगातार मूसलाधार बारिश के कारण रावी नदी में पानी का स्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ना शुरू हो गया है। नदी के तेज बहाव और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए मकोड़ा पत्तन से चलने वाली किश्ती (नाव) सेवा को तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया गया है। इस किश्ती सेवा के ठप होने से रावी दरिया के पार बसे करीब आधा दर्जन गांवों का मुख्य क्षेत्र से संपर्क पूरी तरह कट गया है, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

​दैनिक जीवन और आवाजाही पर पड़ा बुरा प्रभाव

​मकोड़ा पत्तन के माध्यम से रोजाना सैकड़ों लोग किश्ती के जरिए दरिया पार करके अपने काम-धंधे के सिलसिले में गुरदासपुर और आसपास के क्षेत्रों में आवाजाही करते हैं। नाव सेवा बंद होने से निम्नलिखित वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं:

  • ​विद्यार्थी: स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
  • ​किसान व मजदूर: अपनी दैनिक मजदूरी, खेती और आवश्यक सामान लेने शहर जाने वाले लोग फंसे हुए हैं।
  • ​आम नागरिक: दैनिक घरेलू जरूरतों की पूर्ति के लिए मुख्य बाजार तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।

​प्रशासन के अनुसार, नदी में पानी का बहाव बेहद तेज है और ऐसे में नाव चलाना जानलेवा साबित हो सकता है, इसीलिए सुरक्षा के तहत इसे रोका गया है।

​स्वास्थ्य सेवाओं और इमरजेंसी को लेकर बढ़ी चिंता

​दरिया पार रहने वाले ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता स्वास्थ्य आपातकाल को लेकर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस दौरान कोई गंभीर बीमार पड़ता है या कोई मेडिकल इमरजेंसी आती है, तो मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना बेहद चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा हो जाएगा।

​प्रशासन से वैकल्पिक प्रबंधों की मांग

​स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने प्रशासन से अपील की है:

  1. ​लगातार निगरानी: रावी नदी के जलस्तर पर 24 घंटे पैनी नजर रखी जाए।
  2. ​वैकल्पिक यातायात: जब तक नदी का जलस्तर सामान्य नहीं होता, तब तक दरिया पार के गांवों के लिए वैकल्पिक आवाजाही के इंतजाम किए जाएं।
  3. ​सुरक्षा को प्राथमिकता: तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी जाए।

​ग्रामीणों का भी मानना है कि जब तक पानी का स्तर सामान्य नहीं हो जाता, तब तक किश्ती सेवा शुरू करना खतरे से खाली नहीं है। इसलिए प्रशासन को तुरंत राहत और वैकल्पिक कदम उठाने चाहिए।

Ami News
Author: Ami News

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