कांगड़ा के ऐतिहासिक काठगढ़ महादेव मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
काठगढ़ (हिमाचल प्रदेश) : सावन के पवित्र महीने में कांगड़ा जिला के ऐतिहासिक काठगढ़ महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। दूर-दूर से—पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के कोने-कोने से—लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर भगवान शिव और मां पार्वती के दर्शन करने पहुँच रहे हैं।
मंदिर की अनोखी मान्यताएँ एवं विशेषताएँ
- शिव-शक्ति का दो रूपों में मिलन: इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ कोई एक शिवलिंग नहीं है। यहाँ शिवलिंग दो भागों में बंटा हुआ है—एक भाग भगवान शिव और दूसरा भाग मां पार्वती का स्वरूप माना जाता है।
- मौसम के साथ बदलती शिवलिंग की दूरी: यह कोई आम शिव मंदिर नहीं है। सर्दियों में दोनों शिवलिंगों के बीच की दूरी बढ़ जाती है, जबकि सावन का महीना आते ही दोनों शिवलिंग करीब आने लगते हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात ये दोनों भाग कुछ पलों के लिए आपस में मिल जाते हैं।
हज़ारों साल पुराना ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व
मंदिर के पंडित श्री सुनील शास्त्री जी के अनुसार, इस स्थान का इतिहास अत्यंत प्राचीन है:
- स्वयंभू प्राकट्य: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब ब्रह्मा जी और विष्णु जी के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ था, तब उनके विवाद को शांत करने के लिए भगवान शिव यहाँ आदि शिवलिंग (अग्निस्तंभ) के रूप में स्वयं प्रकट हुए थे।
- रामायण व इतिहास से जुड़ाव: माना जाता है कि श्री राम के भाई भरत अपने ननिहाल जाते समय व्यास नदी के तट पर स्थित इस स्थान पर विश्राम करते थे और जल चढ़ाकर पूजा-अर्चना करते थे।
- महाराजा रणजीत सिंह का योगदान: जब महाराजा रणजीत सिंह यहाँ आए, तो उन्होंने इस स्थान की खुदाई का प्रयास किया। बाद में भूल का अहसास होने पर उन्होंने यहाँ क्षमा याचना की, हवन-यज्ञ करवाया और अष्टभुजा चबूतरे वाले मंदिर का निर्माण कराया। सिकंदर भी व्यास नदी के इस क्षेत्र से आगे नहीं बढ़ पाया था।
भक्तों का अनुभव और व्यवस्थाएँ
मंदिर में सावन के दौरान विशेष हवन-यज्ञ आयोजित किए जा रहे हैं। काठगढ़ आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर कमेटी द्वारा लंगर, ठहरने और जल की बेहतर व्यवस्था की गई है।
“सावन के महीने में शिव और शक्ति के इस अनोखा और अद्भुत रूप का दर्शन करना अपने आप में एक परम सुखद और आध्यात्मिक अनुभव है।” — स्थानीय श्रद्धालु













