पीएम मोदी ने नव-निर्वाचित NDA सांसदों संग की नाश्ता बैठक: संसदीय कार्यप्रणाली और रणनीति पर हुआ मंथन
‘दिल्ली के राजनीतिक नैरेटिव में न उलझें, सीखने पर दें ध्यान’ — प्रधानमंत्री ने सांसदों को दी अहम सलाह; गठबंधन में समन्वय और प्रभावी भागीदारी पर जोर।
विशेष संवाददाता | नई दिल्ली
संसद के आगामी सत्र से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक आवास पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नव-निर्वाचित लोकसभा सांसदों के साथ एक औपचारिक ‘नाश्ता बैठक’ की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नए सांसदों से परिचयात्मक संवाद स्थापित करना, संसदीय कार्यप्रणाली की बारीकियों से अवगत कराना और सदन में सरकार की रणनीति को मजबूती देना था।
📌 बैठक की मुख्य बातें:
- संसदीय भूमिका पर जोर: सांसदों को बताया गया कि वे सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने में कैसे सक्रिय भूमिका निभाएं और अपने संसदीय क्षेत्र की समस्याओं को प्रभावी ढंग से कैसे उठाएं।
- विपक्ष से सौहार्द: पीएम मोदी ने सांसदों से कहा कि वे विपक्षी दलों के नेताओं व सांसदों के साथ भी बेहतर और सौहार्दपूर्ण संबंध बनाकर रखें।
- दिल्ली के नैरेटिव से दूरी: प्रधानमंत्री ने सलाह दी कि सांसद दिल्ली की राजनीतिक बयानबाजी और ‘नैरेटिव’ के जाल में उलझने के बजाय देश हित और सीखने पर अपना समय लगाएं।
गठबंधन में बेहतर समन्वय की पहल
सूत्रों के अनुसार, यह बैठक प्रधानमंत्री मोदी के सांसदों के साथ निरंतर संवाद कार्यक्रम का हिस्सा है। सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर बेहतर तालमेल और संसद में प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराने के उद्देश्य से यह निमंत्रण भेजा गया था।
इस बैठक में नव-निर्वाचित NDA सांसदों के अलावा एनसीपीआई (NCPI) के वे सदस्य भी शामिल रहे जिन्हें तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों का समर्थन प्राप्त है। साथ ही, शिवसेना (यूबीटी) से अलग होकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए लोकसभा सांसदों को भी आमंत्रित किया गया था।
बुधवार को BJP सांसदों संग हुई थी चर्चा
उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले (बुधवार को) भी प्रधानमंत्री ने भाजपा के 37 सांसदों के साथ अपने निवास पर इसी तरह की नाश्ता बैठक की थी। अनौपचारिक माहौल में हुई उस बैठक में सुशासन, संसदीय कार्यों और सांगठनिक तालमेल जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई थी।
निजी अनुभव किए साझा: बुधवार की बैठक में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े और तरुण चुघ समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। प्रधानमंत्री ने सांसदों के साथ अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए और उन्हें संसद के समय का अधिकतम उपयोग सीखने में करने का आग्रह किया।











