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डलहौजी के जंगलों में पहली बार दिखा दुर्लभ ‘हिमालयी सेरो’, कैमरा ट्रैप में कैद हुई पहली वीडियो रिकॉर्डिंग

डलहौजी के जंगलों में पहली बार दिखा दुर्लभ ‘हिमालयी सेरो’, कैमरा ट्रैप में कैद हुई पहली वीडियो रिकॉर्डिंग

  • ​वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से चंबा जिले से आई बड़ी और उत्साहजनक खबर
  • ​वन अरण्यपाल राकेश कुमार बोले- पश्चिमी हिमालय में जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती का बड़ा प्रमाण

​चंबा/डलहौजी (जितेंद्र मेहरा): हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के डलहौजी कैचमेंट क्षेत्र से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक अत्यंत उत्साहजनक और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। डलहौजी के घने जंगलों में पहली बार अत्यंत दुर्लभ और शर्मीले स्वभाव वाले वन्यजीव ‘हिमालयी सेरो’ (Himalayan Serow) की मौजूदगी दर्ज की गई है। वन विभाग द्वारा लगाए गए कैमरा ट्रैप में इस दुर्लभ प्राणी की गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं। विभाग के अनुसार, डलहौजी कैचमेंट क्षेत्र में हिमालयी सेरो की उपस्थिति का यह पहला प्रलेखित (Documented) वीडियो साक्ष्य है, जो क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

​क्यों खास है ‘हिमालयी सेरो’ की मौजूदगी?

​हिमालयी सेरो एक अत्यंत शर्मीला और दुर्लभ खुरदार (Ungulate) वन्यजीव है, जो मुख्य रूप से घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में निवास करता है। आम तौर पर इंसानी नजरों से दूर रहने वाले इस जीव का डलहौजी के कैचमेंट एरिया में दिखना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि संबंधित क्षेत्र का प्राकृतिक आवास (Natural Habitat) अभी भी पूरी तरह सुरक्षित, प्राकृतिक और संतुलित है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि सेरो की मौजूदगी से यह साबित होता है कि इलाके का वन पारिस्थितिकी तंत्र बेहद तंदुरुस्त है।

​संरक्षण रणनीतियों को मिलेगी नई दिशा: वन अरण्यपाल

​मामले की पुष्टि करते हुए वन अरण्यपाल (Conservator of Forests) राकेश कुमार ने बताया:

​”कैमरा ट्रैप में हिमालयी सेरो का रिकॉर्ड होना वन विभाग के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह रिकॉर्ड न केवल क्षेत्र की वन्यजीव विविधता को एक नई पहचान देगा, बल्कि पश्चिमी हिमालय में इस प्रजाति के फैलाव और संरक्षण से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी को भी सुदृढ़ करेगा। ऐसे वैज्ञानिक दस्तावेज वन्यजीव संरक्षण योजनाओं को भविष्य में और अधिक प्रभावी बनाने में मददगार साबित होंगे।”

​उन्होंने आगे कहा कि वन विभाग भविष्य में भी कैमरा ट्रैप आधारित निगरानी (Camera Trap Monitoring) को और अधिक मजबूत करेगा, ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा को लेकर निरंतर प्रयास जारी रखे जा सकें।

​भविष्य के शोध और निगरानी के लिए अहम दस्तावेज

​पर्यावरण व वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, कैमरा ट्रैप में कैद हुआ यह दुर्लभ वीडियो भविष्य में शोधकर्ताओं, अनुसंधान, निगरानी और संरक्षण रणनीतियों के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगा।

​वन विभाग ने आम जनता और स्थानीय निवासियों से भी अपील की है कि वे वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा में विभाग का सहयोग करें, ताकि हिमालय की यह अनमोल जैव विविधता आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित बनी रहे।

Ami News
Author: Ami News

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