बिना इंश्योरेंस नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
देश में 50% से अधिक वाहन बिना वैध बीमा के; नियम लागू करने के लिए चलेगा पायलट प्रोजेक्ट
नई दिल्ली: देश की सड़कों पर बिना वैध बीमा (Insurace) के दौड़ रहे वाहनों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि जिन वाहनों के पास वैध ‘थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस’ (Third-Party Insurance) नहीं है, उन्हें पेट्रोल पंपों पर ईंधन (पेट्रोल या डीजल) न दिया जाए। अदालत ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए केंद्र सरकार को एक पायलट प्रोजेक्ट (Pilot Project) शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
VAHAN डेटाबेस और कैमरे से ट्रैक होंगे वाहन
इस नए नियम को सख्त और पारदर्शी बनाने के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय के ‘वाहन’ (VAHAN) पोर्टल को पेट्रोल पंपों के ऑटोमेटेड सिस्टम और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों से जोड़ा जाएगा।
- तुरंत होगी पहचान: पेट्रोल पंपों पर लगे सीसीटीवी कैमरे जैसे ही वाहन की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे, उसकी इंश्योरेंस की स्थिति स्क्रीन पर दिख जाएगी।
- ऑटो-लॉक सिस्टम: यदि वाहन का बीमा समाप्त हो चुका होगा, तो ईंधन भरने वाली नोज़ल स्वचालित रूप से लॉक हो सकती है या पंप कर्मचारी ईंधन देने से मना कर देंगे।
कटेगा 2,000 रुपये का ई-चालान
नियमों के तहत, बिना बीमा वाले वाहनों को केवल ईंधन देने से ही नहीं रोका जाएगा, बल्कि सिस्टम स्वचालित रूप से ट्रैफिक पुलिस को भी सूचित कर देगा। इसके तुरंत बाद मोटर वाहन अधिनियम की धारा 196 के तहत 2,000 रुपये का ऑन-द-स्पॉट ई-चालान काटा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस प्रमुखों (DGP) को इस आदेश का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया है।
पीड़ितों की मदद के लिए उठाया गया सख्त कदम
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में चलने वाली लगभग 50 प्रतिशत से अधिक गाड़ियों का कोई वैध बीमा नहीं है। अदालत ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब ऐसे अन-बीमित वाहनों से दुर्घटनाएं होती हैं, तो पीड़ित परिवारों को कोई आर्थिक मुआवजा नहीं मिल पाता और उन्हें सालों तक अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
कानूनी नियम: मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 146 के तहत हर वाहन का वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस होना पहले से ही अनिवार्य है।
वाहन चालकों के लिए सलाह
कार्रवाई और चालान से बचने के लिए वाहन मालिकों को सलाह दी गई है कि:
- अपने वाहनों का इंश्योरेंस समय पर रीन्यू (Renew) करवाएं।
- इंश्योरेंस की अपडेटेड कॉपी ‘m-Parivahan’ या ‘DigiLocker’ ऐप में डिजिटल रूप से तैयार रखें।











