एनएच विभाग की लापरवाही से ताहड़ गांव पर मंडराया संकट: मकानों और गौशालाओं में पड़ीं गहरी दरारें, दहशत में ग्रामीण
* भटियात की बैली पंचायत के ताहड़ गांव में 4 मकान और 2 गौशालाएं क्षतिग्रस्त
* मवेशियों को खुले में बांधने को मजबूर पीड़ित, जंगली जानवरों का भी सता रहा डर
* पंचायत प्रधान ने दिया एक सप्ताह का अल्टीमेटम, मांग पूरी न होने पर चक्का जाम की चेतावनी
जितेंद्र मेहरा, चंबा (हिमाचल प्रदेश)हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में भारी बारिश अब सिर्फ आफत नहीं, बल्कि आम जनजीवन के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी है। भटियात उपमंडल के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बैली के ताहड़ गांव में लगातार हो रही बारिश और प्रशासनिक अनदेखी के कारण चार रिहायशी मकानों और दो गौशालाओं में गहरी दरारें आ गई हैं। इस स्थिति से ग्रामीण बेहद डरे हुए हैं और रात भर जागकर समय बिताने को मजबूर हैं।
बेघर होने की कगार पर परिवार, खतरे में मवेशी
बारिश के कारण स्थानीय निवासी राकेश कुमार, बुद्धि प्रकाश, गुड्डी देवी, जोगिंदर राणा और राजेश कुमार के मकानों की दीवारों और फर्श में चौड़ी-चौड़ी दरारें पड़ गई हैं। हर बीतती बारिश के साथ ये दरारें और चौड़ी होती जा रही हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
पीड़ित महिला रेणु ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि घरों की स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि अंदर रहने में डर लगता है। वहीं, दो गौशालाएं पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण मवेशियों को खुले आसमान के नीचे बांधना पड़ रहा है। लगातार होती बारिश और ऊपर से जंगली जानवरों का खतरा पीड़ितों की चिंताओं को और बढ़ा रहा है।
“एनएच विभाग की लापरवाही बनी तबाही की वजह”
बैली पंचायत के प्रधान जय श्री राम और उपप्रधान शिव कुमार ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया। पंचायत प्रधान जय श्री राम ने इस पूरी स्थिति के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) विभाग की घोर लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है।
उनका आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान पानी की निकासी के लिए जो पाइपलाइन बिछाई गई थी, वह सही तरीके से नहीं डाली गई। इस पाइपलाइन से हो रहे पानी के रिसाव (Leakage) ने पूरे गांव की जमीन को भीतर से खोखला और कमजोर कर दिया है, जिससे मकान धंस रहे हैं।
प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम डलहौजी अनिल भारद्वाज ने प्रभावित परिवारों को नियमानुसार हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिया है। हालांकि, पंचायत प्रतिनिधि इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं।
पंचायत प्रधान जय श्री राम ने प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि पूरे गांव का त्वरित वैज्ञानिक सर्वे करवाकर प्रभावितों को सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास व मुआवजा नहीं दिया गया, तो ग्रामीण चक्का जाम करने के लिए मजबूर होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
- प्रशासनिक सुस्ती: क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे या जनहानि का इंतजार कर रहे हैं?
- मुख्य मांग: ग्रामीणों की मांग है कि पूरे गांव की भूगर्भीय जांच (Scientific Survey) कराई जाए ताकि यह पता चल सके कि गांव रहने लायक है या नहीं, और समय रहते लोगों की जान बचाई जा सके।












