बेखौफ माइनिंग माफिया: हिमाचल में रुका अवैध खनन, आवाज उठाने वाले पर पंजाब पुलिस ने ठोका पर्चा
पठानकोट / नूरपुर: मानसून के दौरान आपदा से बचाव के लिए नदियों और नालों में खनन पर पूरी तरह पाबंदी होने के बावजूद अवैध माइनिंग माफिया बेखौफ होकर कुदरत का सीना छलनी कर रहा है। मामला हिमाचल प्रदेश की खन्नी पंचायत के अंतर्गत आते ब्राह्मणा दा नाल क्षेत्र का है, जहाँ रात-दिन अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है।
हैरानी की बात यह है कि जब स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता वशीर खान ने 19 जुलाई की रात अवैध खनन का विरोध किया, तो मौके से दो ट्रक और दो जेसीबी मशीनें तो फरार हो गईं, लेकिन 30-35 लोगों के गिरोह ने उन्हें घेर लिया।
हिमाचल पुलिस ने बचाया, पंजाब पुलिस ने दर्ज किया मामला
घटना के दौरान जब स्थिति बिगड़ी, तो पीड़ित वशीर खान ने रात 3 बजे हिमाचल पुलिस (नूरपुर) को फोन कर अपनी जान बचाई। हिमाचल पुलिस ने मौके पर पहुँचकर वशीर खान को सुरक्षित निकाला। लेकिन असली मोड़ इसके बाद आया—अगले ही दिन (20 जुलाई) पंजाब की चक्की पड़ाव (पठानकोट) पुलिस ने वशीर खान के खिलाफ ही पर्चा (मामला) दर्ज कर दिया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि:
- घटना हिमाचल प्रदेश के क्षेत्राधिकार में हुई, फिर पंजाब पुलिस ने किस आधार पर मामला दर्ज किया?
- क्या सीमा पार तक माइनिंग माफिया की जड़ें इतनी गहरी हैं कि प्रशासन उन्हें संरक्षण दे रहा है?
FIR के बावजूद 3 दिन की ताजा फुटेज ने खोली पोल
माफिया और पुलिस की इस साठगांठ का पर्दाफाश तब हुआ जब 1, 2 और 3 तारीख की लगातार फुटेज सामने आई:
- 1 तारीख (शाम 8:00 बजे): भारी मशीनों के साथ खनन जारी।
- 2 तारीख (शाम 5:35 बजे): बिना किसी खौफ के बेधड़क माइनing।
- 3 तारीख (सुबह 9:10 बजे): दिन-दिहाड़े अवैध खनन कार्य चालू।
”मुझे हथियार के केस में फंसाने की मिल रही धमकियाँ” — पीड़ित वशीर खान
पीड़ित वशीर खान ने बताया, “19 तारीख की रात जब मैंने जय शंकर और हरिओम क्रशर की अवैध माइनिंग वाली गाड़ियों को रोका, तो माफिया के दर्जनों लोग इकट्ठे हो गए और मुझे घेर लिया। हिमाचल पुलिस ने आकर मुझे बचाया, लेकिन अगले ही दिन पंजाब पुलिस ने मुझ पर क्रशर मालिकों के दबाव में मामला दर्ज कर दिया। अब पुलिसकर्मी मुझे फोन कर धमका रहे हैं कि अगर पुलिस स्टेशन नहीं आया तो असले (हथियार) का झूठा केस डालकर अंदर कर देंगे। क्षेत्र में आज भी बेधड़क माइनिंग जारी है।”
बड़ा सवाल: क्या माइनिंग विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सो चुका है या फिर माफिया को किसी बड़े राजनीतिक संरक्षण का वरदहस्त प्राप्त है?













