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AMI News: पनबस, पंजाब रोडवेज व PRTC कर्मचारियों की तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल शुरू, बस स्टैंडों पर हाहाकार

AMI News: पनबस, पंजाब रोडवेज और PRTC के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल शुरू, बस स्टैंडों पर यात्री बेहाल

​पठानकोट/पंजाब: पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी (PRTC) के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 3 अगस्त से तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल शुरू कर दी है। पठानकोट डिपो सहित पूरे प्रदेश में कर्मचारियों ने जोरदार रैली निकाली और पंजाब सरकार के खिलाफ चक्का जाम कर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

​सरकारी बसों के पहिए थमते ही राज्य भर के बस स्टैंडों पर अव्यवस्था का माहौल बन गया। सबसे ज्यादा परेशानी रोजाना सफर करने वाली महिला यात्रियों, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों और नौकरीपेशा वर्ग को उठानी पड़ रही है।

​70 बैठकों के बाद भी सिर्फ आश्वासन, 800 बसें खराब: यूनियन नेता

​प्रदर्शन के दौरान यूनियन के प्रदेश नेताओं जगदीशश्वर सैनी और दविंदर सिंह लाली ने सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया।

  • ​70 बेनतीजा बैठकें: यूनियन नेताओं ने बताया कि पिछले चार वर्षों में सरकार के साथ लगभग 70 बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन हर बार केवल खोखले आश्वासन ही मिले और किसी भी मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
  • ​खटारा बेड़ा, नई बसों का अकाल: पंजाब रोडवेज के बेड़े में करीब 800 बसें पूरी तरह खराब हो चुकी हैं, लेकिन सरकार नई बसों की खरीद नहीं कर रही है।
  • ​वादाखिलाफी और कमेटियों का खेल: सत्ता में आने से पहले सरकार ने ठेकेदारी प्रथा खत्म कर कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने का वादा किया था, लेकिन अब तक केवल कमेटियां बनाकर समय बिताया जा रहा है।
  • ​करोड़ों का EPF व ESI घोटाला: नेताओं ने ठेकेदारों पर कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ (EPF) और ईएसआई (ESI) के नाम पर करोड़ों रुपये की भारी अनियमितताएं करने का भी गंभीर आरोप लगाया।

​हड़ताल का आम जनता पर सीधा असर

  1. ​महिला यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें: पंजाब सरकार द्वारा महिलाओं को दी गई मुफ्त यात्रा सुविधा हड़ताल के कारण ठप हो गई। घंटों इंतजार के बाद बसें न मिलने पर महिलाओं को निजी बसों में मजबूरीवश भारी किराया देकर सफर करना पड़ा।
  2. ​विद्यार्थी परेशान, छूटी कक्षाएं: रोडवेज बसों में मिलने वाले रियायती और मुफ्त बस पास हड़ताल के आगे बेअसर साबित हुए। गांवों से शहरों में पढ़ने आने वाले छात्र-छात्राएं बस स्टैंडों पर भटकते रहे, जिससे कई विद्यार्थियों की कक्षाएं और कोचिंग छूट गईं।
  3. ​निजी बस और ऑटो चालकों की चांदी: सरकारी बसें बंद होते ही निजी बस ऑपरेटरों और ऑटो-रिक्शा चालकों ने मनमाना किराया वसूलना शुरू कर दिया। ऑटो और ई-रिक्शा चालकों ने यात्रियों की लाचारी का फायदा उठाकर दो से तीन गुना तक किराया बढ़ा दिया।

​मांगें नहीं मानीं तो मानसून सत्र में करेंगे भूख हड़ताल और CM आवास का घेराव

​यूनियन नेताओं ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों—कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, समान काम-समान वेतन और ठेकेदारी प्रथा खत्म करने—पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आगामी मानसून सत्र के दौरान कर्मचारी भूख हड़ताल करेंगे और मुख्यमंत्री आवास का घेराव भी करेंगे।

​फिलहाल बस डिपो में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है, जबकि यात्री घंटों बस स्टैंड पर अपनी मंजिल तक पहुंचने के विकल्प तलाशते नजर आ रहे हैं।

Ami News
Author: Ami News

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