भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा: 7वां स्वदेशी युद्धपोत ‘मछलीपटनम’ हुआ लॉन्च
कोच्चि/नई दिल्ली: भारतीय नौसेना के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे 8 एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW SWC) जहाजों की श्रृंखला में 7वां युद्धपोत ‘मछलीपटनम’ बुधवार को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।
इस स्वदेशी युद्धपोत का शुभारंभ गुलरुख आनंद द्वारा किया गया। इस अवसर पर सैन्य मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव वाइस एडमिरल अतुल आनंद विशेष रूप से उपस्थित रहे। समारोह में भारतीय नौसेना और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों सहित कई गणमान्य अतिथि शामिल हुए।
नाम का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
’मछलीपटनम’ नाम का गहरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है। इसका नाम आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में स्थित ऐतिहासिक बंदरगाह शहर ‘मछलीपटनम’ के नाम पर रखा गया है, जो भारत के पूर्वी तट पर अपनी समृद्ध समुद्री विरासत और समृद्ध व्यापारिक इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। यह युद्धपोत मछलीपटनम की ऐतिहासिक भावना और विरासत को प्रदर्शित करने के साथ-साथ देश के समुद्री हितों की रक्षा के लिए भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
आधुनिक क्षमताओं से लैस युद्धपोत
नौसेना के अनुसार, यह युद्धपोत तटीय सुरक्षा को मजबूत करने और समुद्री क्षेत्र में सतर्कता (Maritime Domain Awareness) बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह पोत निम्नलिखित उन्नत क्षमताओं से लैस है:
- पनडुब्बी रोधी अभियान (Anti-Submarine Warfare): जलभराव वाले उथले पानी में दुश्मनों की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें बेअसर करने में सक्षम।
- समुद्री निगरानी: पानी के भीतर लगातार निगरानी बनाए रखना।
- तटीय सुरक्षा व माइन बिछाना: कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों और समुद्री बारूदी सुरंगों (Mines) से निपटने/बिछाने की क्षमता।
’आत्मनिर्भर भारत’ का जीवंत उदाहरण
यह युद्धपोत 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से तैयार किया गया है, जो भारतीय जहाज निर्माण उद्योग की बढ़ती क्षमताओं और रक्षा उत्पादन में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ‘मछलीपटनम’ के नौसेना में शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की परिचालन तैयारियों को नई धार मिलेगी।











