लोक परीक्षा विधेयक का समर्थन: “बयानों से नहीं, ठोस कदमों से रुकेगा पेपर लीक” — राघव चड्ढा
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक’ का जोरदार समर्थन किया। उच्च सदन में चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि देश के युवाओं और छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल सरकार के मुखिया के रूप में, बल्कि देश के युवाओं के अभिभावक के रूप में उनकी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया है।
चड्ढा ने स्पष्ट किया कि विपक्ष में रहने के बाद अब सत्ता पक्ष में होने के नाते उनकी जिम्मेदारी है कि वे केवल भाषण न दें, बल्कि संस्थागत और ठोस उपायों के जरिए प्रणाली को दुरुस्त करें।
”केवल बयानों से नहीं, नीतिगत बदलाव से होगा समाधान”
सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान सिर्फ बयानों या मीडिया में दिए गए भाषणों से संभव नहीं है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “जिस तरह क्रोसिन (Crocin) की गोली से कैंसर का इलाज नहीं हो सकता, उसी तरह बयानबाजी से पेपर लीक को नहीं रोका जा सकता। इसके लिए कड़े और संस्थागत कदम उठाने होंगे।” उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं (CBT) को बढ़ावा देने और संगठित माफिया पर लगाम कसने के प्रावधानों का स्वागत किया।
छात्रों के संघर्ष और कड़े कानूनों का जिक्र
राघव चड्ढा ने कोटा, दिल्ली, जयपुर, चंडीगढ़ और पटना जैसे कोचिंग हब में दिन-रात 18 घंटे पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों और उनके परिवारों के त्याग को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि परिवार पेट काटकर और कर्ज लेकर बच्चों को पढ़ाते हैं, लेकिन पेपर लीक की एक घटना उनकी वर्षों की तपस्या को बर्बाद कर देती है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों का शांतमयी प्रदर्शन और सवाल पूछना उनका संवैधानिक अधिकार है, और इसे किसी राजनीतिक दल का मंच नहीं बनने देना चाहिए।
विधेयक के प्रमुख बिंदु और सख्त प्रावधान:
- संगठित अपराध का दर्जा: यह विधेयक पेपर लीक को किसी एक व्यक्ति की चूक न मानकर एक ‘संगठित गिरोह’ द्वारा किया गया अपराध मानता है।
- जांच के दायरे में पूरी चेन: प्रिंटिंग प्रेस कर्मचारी, लॉजिस्टिक्स हैंडलर, कोचिंग माफिया, सॉल्वर गैंग और परीक्षा अधिकारी—सब पर शिकंजा कसा जाएगा।
- स्पेशल टास्क फोर्स (STF): गड़बड़ी की किसी भी आशंका पर गठित टास्क फोर्स को 2 महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी।
चड्ढा ने कहा कि सरकार ने छात्रों की चिंताओं को परिवार के बच्चे की चिंता की तरह गंभीरता से लिया है और सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।











