प्रशासन लाचार, ‘राजू’ बने मददगार: भीख के पैसों से गड्ढे भरवा रहे दिव्यांग
पठानकोट : जब करोड़ों का बजट, बड़ी-बड़ी सरकारी गाड़ियाँ और वादों की बड़ी फेहरिस्त ज़मीनी हकीकत के आगे पस्त हो जाए, तो जनता को किसके सहारे छोड़ दिया जाता है? पठानकोट के छोटी रेलवे लाइन और मक्खन ढाबा के पास बने नर्कनुमा रास्तों को देखकर तो यही लगता है कि यहाँ प्रशासन पूरी तरह लाचार हो चुका है। लेकिन इसी शहर में एक ऐसा इंसान भी है, जिसके पास न तो कोई सरकारी पद है और न करोड़ों का बजट, फिर भी वह नगर निगम की नाकामियों पर करारा तमाचा जड़ रहा है।
हम बात कर रहे हैं पठानकोट के दिव्यांग राजू जी की, जो सड़कों पर भीख माँगकर गुज़ारा करते हैं। इससे पहले भी भीख के पैसों से बेटियों की शादियाँ करवाकर मिसाल पेश कर चुके राजू जी अब शहर की टूटी सड़कों और गहरे गड्ढों को भरवाने के काम में जुट गए हैं।
“दो-तीन बार खुद गिरा, लोगों की तकलीफ नहीं देखी गई”
संवाददाता से बात करते हुए राजू जी ने अपना दर्द बयाँ किया:
“मैं इस टूटी सड़क पर खुद दो-तीन बार गिर चुका हूँ, मुझे चोटें भी आई हैं। यहाँ कई लड़कियाँ और बच्चे गिर चुके हैं। जब प्रशासन और नेता लंबे-लंबे दावों के बाद भी कुछ नहीं कर पाए, तो मैंने अपनी जेब (भीख के पैसों) से खर्च करके यह गड्ढा भरवाने का फैसला किया। यह काम तो सरकारों का है, लेकिन जब उनके पास नीयत नहीं है, तो मुझे आगे आना पड़ा।”
उन्होंने स्थानीय प्रतिनिधियों, नगर निगम और जनप्रतिनिधियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यहाँ से बड़े-बड़े नेता और अफ़सर गुज़रते हैं, लेकिन कोई ध्यान नहीं देता।
प्रशासनिक टालमटोल पर खड़ा हुआ सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर संबंधित विभागों और एक्सएन (XEN) से कई बार बातचीत की जा चुकी है। शुरुआत में अफ़सरों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में पल्ला झाड़ते हुए इसे रेलवे विभाग का मामला बता दिया।
सड़क पर पानी भरा हुआ है, जगह-जगह गहरे गड्ढे हैं और हर मिनट आम लोग हादसे का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में राजू जी द्वारा भीख के पैसों से इस सड़क की मरम्मत करवाना नगर निगम और स्थानीय प्रशासन के मुँह पर तमाचा है।
जनता ने सराहा, निगम पर कसा तंज
मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने राजू जी के इस कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की। एक राहगीर ने कहा, “इतनी सरकारें और निगम के रहते हुए जो काम अधिकारियों को करना चाहिए था, वह एक सामान्य आदमी भीख माँगकर करवा रहा है। यह बेहद सराहनीय और आंखें खोलने वाली बात है।”
‘अकेले इंसान की नीयत ने नगर निगम के दावों की हवा निकाल दी है। अब देखना यह होगा कि क्या इस शर्मनाक स्थिति के बाद भी प्रशासन जागता है या राजू जी को ही शहर की बाकी सड़कों का ठेका सँभालना पड़ेगा।’












