एशिया की सबसे बड़ी गोखुर झील ‘कांवर’ का घटता दायरा: NGT सख्त, केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बिहार के बेगूसराय स्थित एशिया की सबसे बड़ी गोखुर झील (Oxbow Lake) ‘कांवर झील’ (काबरताल) की लगातार बिगड़ती पारिस्थितिक स्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने इस मामले में केंद्र सरकार, बिहार सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
NGT ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए यह कार्रवाई की है। रिपोर्ट में बेगूसराय से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर में स्थित छौड़ाही/चेरिया बरियारपुर ब्लॉक की इस ऐतिहासिक झील के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे को उजागर किया गया था।
झील की बदहाली और गिरता जलस्तर
NGT की पीठ ने सुनवाई के दौरान चिंता जताते हुए कहा:
- घटता क्षेत्रफल: कभी लगभग 63 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैली यह प्राकृतिक झील आज पानी की भारी कमी और अवैध कब्जों (अतिक्रमण) के कारण छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटती जा रही है।
- नदी के घुमाव से निर्माण: इस ऐतिहासिक झील का निर्माण बूढ़ी गंडक नदी के घुमावदार बहाव (Meandering Flow) और मुख्य धारा से कटने के कारण हुआ था।
जैव विविधता और मत्स्य पालन पर गंभीर असर
आद्रभूमि (Wetland) के सिकुड़ने और लगातार हो रहे पर्यावरणीय क्षरण के कारण झील के पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुंचा है:
देसी मछलियों की प्रजातियां विलुप्त: पानी का दायरा घटने से झील में मछलियों की आबादी और जैव विविधता में भारी गिरावट आई है। कई स्थानीय और देशी मछलियों की प्रजातियां या तो बहुत कम हो गई हैं या झील के कई हिस्सों से पूरी तरह गायब हो चुकी हैं।
क्या होती है ‘गोखुर झील’ (Oxbow Lake)?
प्राकृतिक परिभाषा: जब कोई नदी मैदानी इलाकों में बहते हुए बड़ा घुमाव (मोंड) बनाती है और समय के साथ अपनी मुख्य धारा से कट जाती है, तो गाय के खुर के आकार (U-शेप) का एक अलग जल निकाय बन जाता है। इसे ही ‘गोखुर झील’ या Oxbow Lake कहा जाता है।











