पेपर लीक पर सरकार का सबसे बड़ा प्रहार: सदन में आज पेश होगा संशोधन विधेयक, 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ तक का जुर्माना
त्वरित न्याय की व्यवस्था: 2 महीने में जांच पूरी करने और 3 महीने में फास्ट-ट्रैक कोर्ट से फैसले का प्रस्ताव
देशभर की प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में एक कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। प्रश्नपत्र लीक और परीक्षाओं में धांधली की रोकथाम के उद्देश्य से ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024’ में संशोधन से संबंधित विधेयक को सदन की कार्यवाही के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया है।
नए संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य पेपर लीक में शामिल गिरोहों, नकल माफिया और दोषियों के खिलाफ बेहद कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
प्रस्तावित विधेयक के मुख्य प्रावधान:
- कड़ा कारावास और जुर्माना: परीक्षाओं में पेपर लीक करने या अनुचित साधनों का उपयोग करने वाले दोषियों को कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल की सजा होगी। साथ ही 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
- संगठित अपराधों पर नकेल: पेपर लीक से जुड़े संगठित सिंडिकेट व माफियाओं के लिए कम से कम 7 साल की कैद और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रस्ताव रखा गया है।
- समयबद्ध जांच (Time-bound Investigation): मामले की जांच लटकाने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाते हुए विधेयक में सभी प्रकार की जांचों को 2 महीने के भीतर पूरा करना अनिवार्य किया गया है।
- विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट (Fast-track Courts): राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को त्वरित अदालतें स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। ये अदालतें चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाएंगी।
नीट धांधली और जनआक्रोश के बाद बैकफुट पर सरकार
यह कदम नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में हुए प्रचंड छात्र प्रदर्शनों और राजनीतिक दबाव के बाद उठाया गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन और हाल ही में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार ने परीक्षा प्रणाली में बड़े पैमाने पर सुधार की प्रक्रिया तेज कर दी है।
उच्च स्तरीय समिति का गठन:
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की संपूर्ण परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए एक उच्च अधिकार प्राप्त समिति (High-Powered Committee) के गठन की घोषणा की है, जो परीक्षा सुधारों की रूपरेखा तैयार करेगी।
शिक्षार्थियों और अभिभावकों में जगी नई उम्मीद
शिक्षविदों और छात्रों का मानना है कि यदि इस कानून को कड़ाई से लागू किया जाता है, तो इससे पेपर लीक माफिया के हौसले पस्त होंगे और लाखों मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा।











