पठानकोट जुडीशियल कोर्ट परिसर में जलभराव, ‘स्विमिंग पूल’ में तब्दील हुई पार्किंग
- इंसाफ की उम्मीद लेकर कोर्ट पहुंचने वाली जनता व कर्मचारी मूलभूत सुविधाओं से वंचित
- पार्किंग शुल्क वसूलने के बाद भी नहीं मिल रहीं व्यवस्थाएं, उठ रहे सवाल
पठानकोट : इंसाफ का मंदिर कहे जाने वाले पठानकोट जुडीशियल कोर्ट परिसर में मूलभूत सुविधाओं का बुरा हाल है। हल्की सी बारिश होते ही कोर्ट परिसर का पार्किंग एरिया किसी ‘स्विमिंग पूल’ या दलदल जैसा नजर आने लगता है। अपने हकों और न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाली आम जनता और यहां तैनात सरकारी कर्मचारियों को हर रोज भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पैदल चलना भी दूभर, गाड़ियों के फंसने का खतरा
कोर्ट परिसर में दाखिल होने वाले पार्किंग क्षेत्र के बाहर बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं, जिनमें मटमैला पानी और कीचड़ जमा है। हालात इतने बदतर हैं कि लोगों के लिए पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। पार्किंग में आने वाले वाहनों के इस कीचड़ में फंसने का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यहां किसी का वाहन क्षतिग्रस्त होता है या कोई दुर्घटना घटती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
पार्किंग शुल्क वसूलने के बाद भी बदहाली क्यों?
हैरानी की बात यह है कि कोर्ट परिसर में आने वाले हर वाहन चालक से पार्किंग स्लिप काट कर शुल्क वसूला जा रहा है। इसके बावजूद वाहन चालकों को पार्किंग के नाम पर केवल अव्यवस्था ही मिल रही है। लोगों का आरोप है कि सरकारी विभाग सुविधाओं के नाम पर शुल्क तो वसूल रहा है, लेकिन धरातल पर सुविधाएं शून्य हैं।
प्रशासन के दावों की खुली पोल
जब इस संबंध में पर्ची काटने वाले कर्मचारियों से बात की गई तो उन्होंने ऑन-कैमरा आने से इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने दबी जुबान में बताया कि बारिशें रुकने के बाद यहां मलबा डालकर रास्ते को ठीक किया जाएगा। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या संबंधित विभाग मानसून से पहले तैयारियों के लिए बारिश का इंतजार कर रहा था? आगामी दिनों में और बारिश होने की संभावना है, ऐसे में विभाग की इस लापरवाही पर सवाल उठना लाजमी है।










