पठानकोट सिविल अस्पताल में बड़ी सौगात: नवजात शिशुओं के सुनने की क्षमता की जांच अब होगी बिल्कुल मुफ्त

पठानकोट:पठानकोट के सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ और बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अस्पताल में अब नवजात शिशुओं (पैदा हुए बच्चों) की सुनने की क्षमता की जांच के लिए करीब ₹3 लाख की लागत से अत्याधुनिक ऑटो एकॉस्टिक एमिशन (OAE) मशीन स्थापित की गई है।
अस्पताल के एसएमओ (Senior Medical Officer) डॉ. सुनील चंदर और कान रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिंद्र की देखरेख में इस आधुनिक मशीन का औपचारिक शुभारंभ कर दिया गया है।

बिना दर्द के मात्र कुछ ही मिनटों में होगी जांच
डॉक्टरों के मुताबिक, इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे जन्म के तुरंत बाद (चाहे बच्चा एक ही दिन का क्यों न हो) बच्चों के कानों की सुनने की क्षमता की जांच बेहद आसानी से की जा सकती है। यह पूरी तरह से ‘नॉन-इनवेसिव’ (Non-invasive) प्रक्रिया है, जिसका मतलब है कि जांच के दौरान बच्चे के शरीर में कोई सुई या दर्दनाक यंत्र नहीं डाला जाता है। सिर्फ कानों में एक छोटा सा यंत्र लगाकर मात्र कुछ ही मिनटों में बिना किसी दर्द के जांच पूरी हो जाती है।
समय पर इलाज से सुधरेगा बच्चों का भविष्य
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी बच्चे में जन्म से ही सुनने की समस्या है, तो समय रहते (शुरुआती दौर में) इसका पता चलने से बच्चों का इलाज तुरंत संभव हो सकता है। यदि इस समस्या को नजरअंदाज किया जाए, तो आगे चलकर बच्चे के बोलने और मानसिक विकास पर भी इसका बुरा असर पड़ता है।

निजी अस्पतालों के महंगे टेस्टों से मिलेगी बड़ी राहत
अस्पताल के एसएमओ ने बताया कि यह सुविधा सरकार की ओर से पूरी तरह से मुफ्त (Totally Free) प्रदान की जा रही है। चाहे बच्चा सामान्य हो या उसे कानों से जुड़ी कोई समस्या हो, सभी नवजात शिशुओं की यह जांच की जाएगी। इस नई सुविधा के शुरू होने से अब गरीब और जरूरतमंद परिवारों को प्राइवेट अस्पतालों के महंगे टेस्टों से बड़ी राहत मिलेगी।
यह मशीन जिले के नवजात बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में एक मील का पत्थर साबित होगी।








