प्रताप वर्ल्ड स्कूल में जिला स्तरीय कार्यशाला: शिक्षकों को सिखाए पर्यावरण संरक्षण के गुर

पठानकोट: स्थानीय प्रताप वर्ल्ड स्कूल में पंजाब राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (PSCST) और जिला शिक्षा विभाग के सहयोग से दो दिवसीय जिला स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल आगाज हुआ। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (भारत सरकार) के समर्थन से आयोजित इस ‘पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम’ में जिले के विभिन्न स्कूलों के लगभग 50 शिक्षकों ने भाग लिया।
कचरा प्रबंधन और कार्बन फुटप्रिंट पर चर्चा
कार्यशाला के पहले तकनीकी सत्र में इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन (IPCA) की महाप्रबंधक सुश्री रीना चड्ढा ने ‘कचरे से परिवर्तन’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने प्लास्टिक और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के माध्यम से कार्बन फुटप्रिंट को कम करने की व्यावहारिक रणनीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर कचरे का सही प्रबंधन कर हम पर्यावरण को बचा सकते हैं।

आकर्षण का केंद्र रहा ‘नेस्ट मेकिंग’ सत्र
दिन का मुख्य आकर्षण इको रूट्स फाउंडेशन के मनोज लीला भट्ट द्वारा आयोजित ‘नेस्ट मेकिंग’ (घोंसला बनाना) सत्र रहा। इस रचनात्मक सत्र के माध्यम से शिक्षकों को जैव विविधता संरक्षण का संदेश दिया गया। शिक्षकों ने स्वयं घोंसले बनाना सीखा, जिसे उनकी रचनात्मकता और प्रकृति के प्रति जुड़ाव के लिए काफी सराहा गया।

मुख्य अतिथियों के विचार
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे उप जिला शिक्षा अधिकारी (Deputy DEO) अमनदीप सिंह ने कहा:
”शिक्षक समाज में परिवर्तन के सबसे बड़े वाहक हैं। यहाँ से प्राप्त ज्ञान जब कक्षाओं तक पहुँचेगा, तभी आने वाली पीढ़ी पर्यावरण के प्रति जागरूक बनेगी।”
जिला EEP समन्वयक संजीव शर्मा ने भी इस पहल की प्रशंसा की।
प्रबंधन का संदेश
स्कूल के निदेशक सनी महाजन ने मेजबानी पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा को पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ना आज के समय की मांग है। वहीं, निदेशक सुश्री ओशिन महाजन और प्राचार्या सुश्री सुभ्रा रानी ने संयुक्त रूप से कहा कि पर्यावरण शिक्षा अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे व्यवहार में लाना अनिवार्य है।

कार्यशाला के पहले दिन का समापन शिक्षकों के सकारात्मक फीडबैक के साथ हुआ। दूसरे दिन भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में विभिन्न महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए जाएंगे।







