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नेशनल लोक अदालत में 9268 मामले पेश, 7719 का निपटारा

नेशनल लोक अदालत में 9268 मामले पेश, 7719 का निपटारा

49,29,98,926 रुपये के अवार्ड पास किए गए

पठानकोट,  पंजाब कानूनी सेवा प्राधिकरण के दिशानिर्देशों के तहत, जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण, पठानकोट के अध्यक्ष-सह-जिला और सत्र न्यायाधीश,  जतिंदर पाल सिंह खुरमी के नेतृत्व में, कोर्ट कॉम्प्लेक्स पठानकोट में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया।

​इस संबंध में जानकारी देते हुए, जिला और सत्र न्यायाधीश  जतिंदर पाल सिंह खुरमी ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में 9 बेंच लगाए गए थे, जिनमें एकता उप्पल (अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश), जसबीर कौर (प्रिंसिपल फैमिली कोर्ट जज), गुरशेर सिंह (अतिरिक्त सिविल जज, सीनियर डिवीजन), बबीता (जज, जूनियर डिवीजन), नाज़मीन सिंह (जज, जूनियर डिवीजन), रवनीत कौर बेदी (जज, जूनियर डिवीजन), आसदीप सिंह (जज, जूनियर डिवीजन), सतनाम सिंह (जज, जूनियर डिवीजन), और चरणजीत सिंह (परमानेंट लोक अदालत) के बेंच शामिल थे। इस अवसर पर सचिव-सह-सी.जे.एम. (Chief Judicial Magistrate) रुपिंदर सिंह भी उपस्थित थे।

​📊 मुख्य बिंदु

​इस लोक अदालत में 9268 मामले पेश किए गए।

​इनमें से 7719 मामलों का निपटारा आपसी सहमति से किया गया।

​इस अवसर पर 49,29,98,926 रुपये के अवार्ड पास किए गए।

​फैमिली कोर्ट जज जसबीर कौर  की कोर्ट में एक ऐसे पति-पत्नी का घर बसाया गया, जिनकी शादी 2012 में हिंदू रीति-रिवाजों और रस्मों के अनुसार हुई थी, लेकिन आपसी मतभेदों के कारण वे 2024 से अलग रह रहे थे। माननीय जज साहिब ने इन दोनों के बीच समझौता करा कर उनका घर फिर से बसाया।

​वहीं, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एकता उप्पल  की कोर्ट में सबसे ज्यादा 43,88,64,692 रुपये के अवार्ड पास किए गए।

​एक अन्य दीवानी मामले (जुगल किशोर बनाम मनजीत सिंह) का निपटारा, जो 2017 से चला आ रहा था, रवनीत कौर बेदी (जज, जूनियर डिवीजन, पठानकोट) द्वारा किया गया।

​लोक अदालत के फायदे

​इस मौके पर, जिला और सत्र न्यायाधीश, पठानकोट,  जतिंदर पाल सिंह खुरमी ने बताया कि:

​लोक अदालत में किसी भी पार्टी की हार नहीं होती, बल्कि दोनों ही पार्टियां केस जीतकर जाती हैं।

​कोर्ट फीस भी वापस कर दी जाती है।

​लोक अदालत का फैसला अंतिम फैसला होता है और इस फैसले के खिलाफ किसी भी अदालत में अपील नहीं की जा सकती है।

​उन्होंने लोगों से अपील की है कि उन्हें अपने झगड़े खत्म करने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा अपने केस लोक अदालत में लगाने चाहिए।

Ami News
Author: Ami News

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