संसद में ‘वंदे मातरम्’ पर ऐतिहासिक चर्चा, PM मोदी बोले- यह स्वतंत्रता संग्राम का ‘मंत्र’

नई दिल्ली:संसद के शीतकालीन सत्र में सोमवार को ‘वंदे मातरम्’ विषय पर एक महत्वपूर्ण चर्चा हुई, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरक भाषण से हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रगीत के आरंभ से लेकर वर्तमान तक के इतिहास का विस्तार से उल्लेख किया।
’वंदे मातरम्’: एक मंत्र, जिसने आजादी को ऊर्जा दी
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘वंदे मातरम्’ के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक ‘मंत्र’ और ‘नारा’ है, जिसने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को ऊर्जावान और प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस गीत ने स्वतंत्रता सेनानियों को बलिदान और तपस्या का मार्ग दिखाया।
प्रधानमंत्री ने कहा, “यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण है कि हम ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष देख रहे हैं। यह एक ऐतिहासिक पल है।”
50वीं और 100वीं वर्षगांठ पर देश की स्थिति
अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री मोदी ने ‘वंदे मातरम्’ की पिछली वर्षगांठों के समय देश की परिस्थितियों का भी जिक्र किया:

50वीं वर्षगांठ के समय भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था।
100वीं वर्षगांठ के समय देश आपातकाल की चपेट में था, जब देशभक्तों को कैद किया गया था।
प्रधानमंत्री ने दुख व्यक्त किया कि जिस गीत ने आजादी की लड़ाई को प्रेरित किया, उसकी 100वीं वर्षगांठ पर देश एक ‘अंधेरे दौर’ से गुज़र रहा था।
150 वर्ष: गौरव और अतीत को बहाल करने का अवसर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष का यह अवसर “उस गौरव और हमारे अतीत के महान हिस्से को बहाल करने का मौका है।” उन्होंने दोहराया कि इस गीत ने ही हमें1947 में आज़ादी दिलाने के लिए प्रेरित किया था।
ऐतिहासिक मील के पत्थर का समय

प्रधानमंत्री ने इस समय को कई ऐतिहासिक घटनाओं के मील के पत्थर के रूप में मनाया जा रहा समय बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि देश इस समय कई महत्वपूर्ण वर्षगांठ मना रहा है:
हाल ही में संविधान की 75वीं वर्षगांठ मनाई गई।
देश सरदार पटेल और बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मना रहा है।
हम गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस की याद भी मना रहे हैं।
अब हम ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष का जश्न मना रहे हैं।







