हिमाचल शिक्षा विभाग में बड़ा फैसला: हाईकोर्ट के आदेश से 800 प्रिंसिपलों की पदोन्नति का रास्ता साफ

शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के शिक्षा विभाग में प्रिंसिपल (स्कूल कैडर) के 800 रिक्त पदों पर लंबित पदोन्नति (Promotion) प्रक्रिया को तुरंत पूरा करने का आदेश दिया है। इस फैसले से विभाग में लेक्चरर (Lecturers) और हेडमास्टर (Headmasters) के हजारों कर्मचारियों को वर्षों बाद राहत मिली है।
800 पदों पर तुरंत प्रमोशन का आदेश
न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) के माध्यम से लेक्चररों और हेडमास्टरों को प्रिंसिपल के पदों पर पदोन्नत किया जाए। ये पद लंबे समय से रिक्त पड़े थे।
सेवानिवृत्त हो रहे लेक्चररों को प्राथमिकता
अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्देश में कहा है कि जो याचिकाकर्ता लेक्चरर 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, उन्हें 23 दिसंबर तक हर हाल में पदोन्नति का लाभ दिया जाए। राज्य सरकार को इस आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट 26 दिसंबर तक कोर्ट में प्रस्तुत करनी होगी।

25 साल की सेवा, एक भी प्रमोशन नहीं
याचिका दायर करने वाले लेक्चररों ने अदालत को बताया कि वे वर्ष 1999–2000 से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक एक भी पदोन्नति नहीं मिली है।
नियमों के अनुसार, शिक्षा विभाग को साल में दो बार डीपीसी आयोजित करना आवश्यक है, लेकिन बीते दो वर्षों से डीपीसी आयोजित नहीं हुई, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान और करियर में ठहराव का सामना करना पड़ा।
50-50 कोटा, फिर भी पद रहे रिक्त
प्रिंसिपल (स्कूल कैडर) के पदों को भरने के लिए 50% कोटा लेक्चररों और 50% कोटा हेडमास्टरों के लिए निर्धारित है। इस स्पष्ट कोटे के बावजूद विभाग 800 से अधिक पदों को लंबे समय से रिक्त छोड़ता आया है। सरकार और विभाग द्वारा देरी के लिए स्कूलों का युक्तिकरण (rationalization) कारण बताया गया, जिसे हाईकोर्ट ने अपर्याप्त माना।

हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक निर्देश से उन हजारों कर्मचारियों में उम्मीद की नई लहर दौड़ी है, जो अपने पूरे कार्यकाल में पदोन्नति मिलने की प्रतीक्षा करते रहे।







