हिमाचल में स्कूलों का मर्जर रद्द: अब एक ही शहर में छात्र चुन सकेंगे सीबीएसई या एचपी बोर्ड

शिमला/धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा फेरबदल करते हुए चार प्रमुख शहरों में स्कूलों के विलय (मर्जर) के फैसले को पलट दिया है। सरकार ने नूरपुर, धर्मशाला, सरकाघाट और देहरा के स्कूलों का मर्जर रद्द कर उन्हें फिर से अलग-अलग इकाइयों के रूप में चलाने का आदेश जारी किया है। इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब इन क्षेत्रों में छात्रों के पास सीबीएसई (CBSE) और प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HPBose) दोनों का विकल्प उपलब्ध होगा।
निदेशक करेंगे अंतिम फैसला
शिक्षा सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, किस स्कूल भवन में सीबीएसई बोर्ड लागू होगा और किसमें प्रदेश बोर्ड चलेगा, इसका अंतिम निर्णय अब स्कूल शिक्षा निदेशक लेंगे। इसके लिए संबंधित स्कूलों के भवन, आधारभूत ढांचे और उपलब्ध सुविधाओं का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।
बदली गई व्यवस्था: हाई स्कूल और सीनियर सैकेंडरी का फॉर्मूला
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन स्कूलों को डिमर्ज (अलग) किया गया है, उनमें से:
- सीबीएसई संबद्ध स्कूल: इन्हें ‘सरकारी सीनियर सैकेंडरी स्कूल’ के रूप में संचालित किया जाएगा।
- प्रदेश बोर्ड (HPBose) संबद्ध स्कूल: इन्हें ‘हाई स्कूल’ के रूप में चलाया जाएगा।
इन शहरों में लागू हुई नई व्यवस्था
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जिला |
स्थान |
सीबीएसई (CBSE) इकाई |
एचपी बोर्ड (HP Board) इकाई |
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कांगड़ा |
धर्मशाला |
पीएम श्री जी.वी.एम.वी. (गर्ल्स स्कूल और हाई स्कूल परिसर में) |
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक (ब्वायज) स्कूल |
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कांगड़ा |
देहरा |
पीएम श्री मॉडल स्कूल (राजकीय हाई स्कूल देहरा परिसर में) |
गर्ल्स सीनियर सैकेंडरी और पीएम श्री मॉडल स्कूल |
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कांगड़ा |
नूरपुर |
बक्शी टेक चंद पीएम श्री मॉडल स्कूल (हाई स्कूल परिसर में) |
गर्ल्स और ब्वायज सीनियर सैकेंडरी स्कूल |
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मंडी |
सरकाघाट |
पीएम श्री राजकीय मॉडल स्कूल (हाई स्कूल सरकाघाट परिसर में) |
गर्ल्स सीनियर सैकेंडरी और मॉडल स्कूल |
सह-शिक्षा (Co-Ed) पर जोर
पूर्व में इन स्कूलों को एकीकृत कर को-एजुकेशनल बनाने का प्रस्ताव था, जिसे अब आंशिक रूप से संशोधित किया गया है। अब ये संस्थान अलग-अलग इकाइयों के रूप में काम करेंगे, लेकिन दोनों ही बोर्डों के तहत सह-शिक्षा (Co-Education) की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
निदेशालय के सख्त निर्देश
शिक्षा निदेशालय ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि:
- स्कूलों के नामों का री-डिजिग्नेशन (पुनः नामकरण) और उनका डिस्प्ले तुरंत सुनिश्चित किया जाए।
- शिक्षक और गैर-शिक्षक स्टाफ का पुनर्वितरण (Redeployment) तुरंत प्रभाव से किया जाए ताकि शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो।
कोट:
”18 फरवरी, 2026 की अधिसूचना में संशोधन कर मर्जर रद्द किया गया है। अब छात्रों को एक ही स्थान पर दो अलग-अलग बोर्डों के विकल्प मिलेंगे, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच में सुधार होगा।” — शिक्षा विभाग प्रवक्ता







