अब रोबोट समझेंगे आपका दर्द! आईआईटी मंडी बना रहा है भावनाओं को समझने वाले ‘स्मार्ट’ साथी

इंसान की अकेलेपन की तलाश और भावनात्मक सहयोग की जरूरत अब तकनीक के जरिए पूरी होने वाली है। आईआईटी मंडी (IIT Mandi) के ‘सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स’ के वैज्ञानिक ऐसे रोबोटिक साथी तैयार कर रहे हैं, जो न केवल काम में हाथ बंटाएंगे, बल्कि आपकी भावनाओं को भी समझेंगे।
खुद की बिजली खुद बनाएंगे रोबोट
आईआईटी मंडी की मोबाइल रोबोटिक्स लैब में ‘एनर्जी हार्वेस्टिंग’ तकनीक पर आधारित रोबोट विकसित किए जा रहे हैं। इन रोबोट्स की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन्हें बार-बार चार्ज करने की झंझट नहीं होगी; ये अपनी ऊर्जा खुद पैदा करने में सक्षम होंगे। इसमें जमीन पर चलने वाले वाहन और हवा में उड़ने वाले ड्रोन का एक ऐसा ‘कोलेबोरेशन’ है, जो आपस में बात करते हुए बाधाओं को पार कर सकते हैं। इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से:
- भूकंप और आपदा क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुँचाने।
- रक्षा क्षेत्र में निगरानी।
- बड़े वेयरहाउस के ऑटोमेटिक मैनेजमेंट में किया जाएगा।
इंसानी अहसास वाली ‘कृत्रिम त्वचा’
प्रोफेसर अमित शुक्ला और उनकी टीम पिछले दो वर्षों से ऐसे ह्यूमनॉइड (Humanoid) रोबोट पर काम कर रही है, जो इंसानों की तरह चल, दौड़ और कूद सकते हैं। शोधकर्ताओं ने एक विशेष कृत्रिम त्वचा (Artificial Skin) विकसित की है। इसे रोबोटिक अंगों पर लगाने से उन्हें तापमान, दबाव और सतह की बनावट का वैसा ही अहसास होगा जैसा हमें होता है।

सोशल रोबोट: मानसिक स्वास्थ्य में मददगार
स्वीडन की एक कंपनी के सहयोग से ऐसे ‘सोशल रोबोट’ तैयार किए जा रहे हैं, जो भावनात्मक रूप से इंसानों से जुड़ सकेंगे। ये रोबोट:
- मानसिक स्वास्थ्य: काउंसलिंग और इमोशनल सपोर्ट देंगे।
- शिक्षा: स्कूलों और लाइब्रेरियों में बच्चों की मदद करेंगे।
दिमाग की तरंगों से चलेंगे ‘मेडिकल रोबोट’
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में आईआईटी मंडी ‘ब्रेन वेव’ (Brain Waves) तकनीक पर काम कर रहा है। इसके जरिए रोबोट को केवल सोचकर या दिमाग की तरंगों से नियंत्रित किया जा सकेगा। ये रोबोट अस्पतालों में सर्जरी (OT) के दौरान सहायता करने और मरीजों की देखभाल करने में सक्षम होंगे। एक स्मार्ट रोबोटिक असिस्टेंट तो 10 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलने की क्षमता रखता है।
”इन रोबोट्स का लक्ष्य इंसानी जीवन को सरल और सुरक्षित बनाना है। इन्हें जिस तरह की ट्रेनिंग दी जाएगी, वे घर के साधारण कामों से लेकर युद्ध के मैदान तक हर भूमिका बखूबी निभाएंगे।”
— प्रोफेसर नरेंद्र कुमार धर, प्रमुख, रोबोटिक्स प्रोग्राम (IIT मंडी)

बॉक्स न्यूज: रोबोटिक्स के नए आयाम
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क्षेत्र |
मुख्य विशेषता |
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रक्षा/आपदा |
ड्रोन और ग्राउंड वाहन का आपसी तालमेल। |
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इंडस्ट्री |
खुद बिजली पैदा करने वाले ‘एनर्जी हार्वेस्टिंग’ रोबोट। |
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हेल्थकेयर |
ब्रेन वेव तकनीक और 10 किमी/घंटा की रफ्तार। |
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इमोशनल सपोर्ट |
काउंसलिंग करने वाले ‘सोशल रोबोट’। |

संपादकीय टिप्पणी: तकनीक और संवेदनाओं का यह मेल आने वाले समय में न केवल श्रम शक्ति को बढ़ाएगा, बल्कि इंसानी रिश्तों और मशीनों के बीच की दूरी को भी कम करेगा।








