भूस्खलन से पठानकोट-भरमौर नेशनल हाईवे ठप, रावी नदी पार कर गंतव्य तक पहुंचे यात्री
गैहरा के पास पहाड़ी दरकने से गिरीं भारी चट्टानें; दूध, ब्रेड और सब्जियों की सप्लाई रुकी, सैकड़ों वाहन फंसे

चम्बा/भरमौर:पठानकोट-चम्बा-भरमौर नेशनल हाईवे (NH-154A) पर लगातार हो रही बारिश अब सफर के लिए जोखिमभरा साबित हो रही है। शुक्रवार देर रात गैहरा के पास पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा दरककर सड़क पर आ गिरा, जिससे हाईवे पूरी तरह बंद हो गया। भारी मलबे और विशालकाय चट्टानों के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और जनजातीय क्षेत्र भरमौर का संपर्क देश-दुनिया से कट गया।

रावी नदी पार करने की मजबूरी
मार्ग बंद होने के कारण यात्रियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी गंभीर थी कि लोगों को जान जोखिम में डालकर पैदल ही रावी नदी पार करनी पड़ी और दूसरी ओर से वाहनों की अदला-बदली कर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा।
देर शाम पहुंची दैनिक वस्तुओं की सप्लाई
एनएच मंडल चम्बा ने मार्ग बहाल करने के लिए तुरंत 3 जेसीबी मशीनें तैनात कीं, लेकिन विशाल चट्टानों के कारण कार्य में भारी बाधा आई। मार्ग अवरुद्ध होने से भरमौर की दैनिक सप्लाई चेन प्रभावित रही। दूध, ब्रेड और सब्जी जैसी आवश्यक वस्तुएं शनिवार देर शाम ही क्षेत्र में पहुंच सकीं। वहीं, वीकेंड होने के कारण होली और भरमौर के विभिन्न प्रोजेक्ट्स में कार्यरत कर्मचारियों को घर लौटते समय भारी फजीहत झेलनी पड़ी।

विधायक डॉ. जनक राज ने सरकार को घेरा
जाम में फंसे भरमौर के विधायक डॉ. जनक राज ने प्रदेश सरकार के खिलाफ तीखी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा:
”भरमौर जनजातीय क्षेत्र को जोड़ने के लिए यह एकमात्र सड़क है। आपात स्थिति से निपटने के लिए सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है। यहाँ विशेष मशीनरी का स्थायी प्रबंध होना चाहिए ताकि जनता को इस तरह की परेशानी न हो।”

अधिकारियों का पक्ष
एनएच मंडल चम्बा के जेई गजन सिंह ने बताया कि गैहरा के पास भूस्खलन के कारण भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया था। उन्होंने कहा, “मार्ग बहाली का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू किया गया है, लेकिन चट्टानों का आकार बहुत बड़ा होने के कारण उन्हें हटाने में समय लग रहा है। जल्द ही मार्ग को यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।”








