बाबा बालक नाथ मंदिर मार्ग पर बड़ा हादसा टला: पहाड़ी से गिरी विशाल चट्टान, अमृतसर की महिला श्रद्धालु घायल

प्रसिद्ध सिद्ध पीठ बाबा बालक नाथ मंदिर, दियोटसिद्ध में गुरुवार रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। अमृतसर से आए श्रद्धालुओं के जत्थे पर अचानक पहाड़ी से एक विशाल चट्टान गिर गई। इस घटना में एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद दो बच्चे चमत्कारिक रूप से बाल-बाल बच गए।
कैसे हुआ हादसा?
घटना गुरुवार रात करीब 10:15 बजे की है। अमृतसर से 15-20 श्रद्धालुओं का एक दल दर्शन के लिए जा रहा था। जब यह जत्था बैरियर नंबर-1 के पास पहुँचा, तभी पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा टूटकर सीधे सड़क पर आ गिरा। चट्टान गिरने के बाद उसके टुकड़े अमृतसर निवासी 40 वर्षीय देवी को जा लगे, जिससे वह लहूलुहान होकर गिर पड़ीं।

त्वरित राहत और उपचार
हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय दुकानदारों और अन्य श्रद्धालुओं ने तुरंत हिम्मत दिखाई और घायल महिला को संभाला।
- प्राथमिक चिकित्सा: मंदिर ट्रस्ट की टैक्सी सेवा में मौजूद फर्स्ट एड किट से तुरंत मरहम-पट्टी की गई।
- अस्पताल: महिला को तत्काल ट्रस्ट के अस्थायी अस्पताल ले जाया गया।
- स्वास्थ्य स्थिति: डॉक्टरों के अनुसार, महिला के घुटने और बाजू में चोटें आई हैं। प्राथमिक उपचार के बाद अब उनकी हालत स्थिर और खतरे से बाहर बताई जा रही है।

प्रशासन की कार्रवाई और भविष्य की योजना
हादसे की सूचना मिलते ही मंदिर प्रशासन हरकत में आ गया है। मंदिर अधिकारी सुभाष मल्होत्रा ने स्थिति का जायजा लिया और निम्नलिखित सुरक्षा उपायों की घोषणा की:
- फेंसिंग (बाड़): प्रभावित और संवेदनशील पहाड़ियों पर जल्द ही सुरक्षा जालियां (Fencing) लगवाई जाएंगी।
- मार्ग परिवर्तन: वर्तमान में श्रद्धालुओं को दुर्घटना वाले स्थान के बजाय सड़क के दूसरे सुरक्षित किनारे से चलने के निर्देश दिए गए हैं।
- सुरक्षा बल: मौके पर एम्बुलेंस और अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर दी गई है।
श्रद्धालुओं में डर, सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने मंदिर मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवालिया निशान लगा दिए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि:
”यहाँ कई ऐसी ढलान वाली पहाड़ियां हैं जहाँ से अक्सर पत्थर गिरते रहते हैं। प्रशासन को संवेदनशील जगहों पर चेतावनी बोर्ड और रात के समय बेहतर रोशनी का प्रबंध करना चाहिए।”

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे पहाड़ी रास्तों पर चलते समय सतर्क रहें और विशेष रूप से रात के समय निर्धारित सुरक्षित मार्ग का ही उपयोग करें।








