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सावधान! शरीर पहले ही देता है स्ट्रोक की आहट: इन 5 संकेतों को न करें नजरअंदाज

सावधान! स्ट्रोक अचानक नहीं आता, शरीर हफ्तों पहले देता है ये 5 बड़े संकेत

विशेषज्ञों की चेतावनी: 80% मामलों को सही जीवनशैली और समय रहते पहचान से रोका जा सकता है।

मेडिकल साइंस में ‘स्ट्रोक’ को सबसे गंभीर इमरजेंसी माना जाता है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब मस्तिष्क तक ऑक्सीजन और खून पहुंचाने वाली नसें या तो फट जाती हैं या उनमें रुकावट (Clot) आ जाती है। अक्सर लोग इसे अचानक आने वाली आपदा मानते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर इसके संकेत हफ्तों पहले देने लगता है। इन संकेतों को पहचानना ही जान बचा सकता है।

⚠️ इन 5 लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज

लक्षण

विवरण

1. असहनीय सिरदर्द

यह सामान्य माइग्रेन नहीं है। अचानक शुरू होने वाला तेज दर्द, जिसके साथ चक्कर आएं या धुंधला दिखे, दिमाग में ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है।

2. शरीर के एक हिस्से में सुन्नपन

अचानक चेहरे, हाथ या पैर का सुन्न होना, विशेषकर शरीर के एक तरफ (Left or Right side)। इसे ‘मिनी स्ट्रोक’ मानकर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

3. बोलने में लड़खड़ाहट

शब्दों का सही उच्चारण न कर पाना या दूसरों की आसान बातों को समझने में कठिनाई होना। यह भाषा को नियंत्रित करने वाले ब्रेन सेल्स पर असर का संकेत है।

4. रोशनी में बदलाव

अचानक धुंधला दिखना या ‘डबल विजन’ (एक का दो दिखना)। इसे आंखों की थकान समझने की गलती जानलेवा हो सकती है।

5. संतुलन बिगड़ना

बिना किसी कारण के सिर घूमना या चलते समय लड़खड़ाहट होना। यह मस्तिष्क में बाधित रक्त प्रवाह का परिणाम हो सकता है।

 

बचाव ही सबसे बड़ा समाधान है

​डॉक्टरों के अनुसार, 80% स्ट्रोक के मामलों को केवल जीवनशैली में बदलाव करके टाला जा सकता है। इसके लिए इन 4 स्तंभों पर ध्यान दें:

    1. ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण: हाई बीपी स्ट्रोक का मुख्य दुश्मन है। नमक कम खाएं और नियमित जांच कराएं।
    2. सक्रिय जीवनशैली: रोजाना कम से कम 30 मिनट की सैर, योग या व्यायाम नसों में ब्लड फ्लो को बेहतर रखता है।
    3. बुरी आदतों का त्याग: धूम्रपान और शराब का सेवन नसों को कमजोर और संकुचित (Narrow) कर देता है, जिससे स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
    4. संतुलित आहार: अपनी डाइट में हरी सब्जियां, फल और कम फैट वाले भोजन को प्राथमिकता दें।

विशेषज्ञ की सलाह: > “स्ट्रोक के मामले में ‘समय ही जीवन’ (Time is Brain) है। यदि इनमें से कोई भी लक्षण कुछ मिनटों के लिए भी दिखे, तो उसे हल्के में न लें। तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें।”

Ami News
Author: Ami News

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