न्याय की विरासत और प्रकृति का जुनून: डॉ. शरद कुमार ब्यास के जीवन के अनछुए पहलू
खास मुलाकात: एक्यूरेट मिरर के संपादक अनिल खुराना के साथ साझा किए जीवन के अनुभव

पठानकोट/चूरू: जब संस्कार और कर्तव्य एक साथ चलते हैं, तो सफलता की कहानी खुद-ब-खुद लिखी जाती है। हाल ही में ‘एक्यूरेट मिरर’ के संपादक और AMI NEWS के सीईओ अनिल खुराना के निवास पर एक आत्मीय मुलाकात हुई, जिसमें राजस्थान न्यायिक सेवा (RJS) के अधिकारी डॉ. शरद कुमार ब्यास अपने परिवार सहित पधारे। इस दौरान हुई बातचीत में उनके न्यायिक सफर, पारिवारिक गौरव और उनकी रचनात्मक शख्सियत के कई दिलचस्प पहलू सामने आए।
एक ही परिवार में ‘जजों की फौज’: विरासत में मिला न्याय का जज्बा
डॉ. शरद ने बताया कि उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा उनके पिता अशोक कुमार ब्यास रहे हैं। श्री ब्यास खुद मेट्रो कोर्ट से जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और उन्होंने अपने बच्चों को हमेशा ईमानदारी और सेवा का पाठ पढ़ाया।
आज इस परिवार का हर सदस्य न्याय की मशाल थामे हुए है:
- डॉ. शरद कुमार ब्यास: वर्तमान में चूरू में एडिशनल सेशन जज के रूप में कार्यरत हैं।
- श्रीमती योगिता ब्यास: डॉ. शरद की धर्मपत्नी भी चूरू में ही एडिशनल सेशन जज के पद पर अपनी सेवाएं दे रही हैं।

- स्वाति ब्यास: डॉ. शरद की बहन, जिन्होंने राजस्थान न्यायिक सेवा की परीक्षा में प्रथम स्थान (टॉपर) हासिल किया था, वर्तमान में चाकसू में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हैं।
- योगिता ब्यास की बहन: डॉ. शरद की साली भी राजस्थान न्यायिक सेवा में एक जज के रूप में कार्य कर रही हैं।
पूरा परिवार न्याय के प्रति समर्पित है और समाज में ईमानदारी की मिसाल पेश कर रहा है।
अदालत की गंभीरता के बीच ‘कवि’ और ‘वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर’
इतनी गंभीर और जिम्मेदारी भरी सेवा के बीच डॉ. शरद ने अपनी रचनात्मकता को भी बखूबी संजोया है। अनिल खुराना जी के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने हँसते हुए बताया कि वे थोड़े कवि भी हैं। कभी-कभी वे ऐसी कविताएँ लिखते हैं जो उनके कानूनी अनुभवों और जीवन की संवेदनाओं को शब्दों में पिरोती हैं।
लेकिन उनका सबसे बड़ा जुनून वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी है। डॉ. शरद एक सच्चे प्रकृति प्रेमी हैं। जब भी वे यात्रा पर निकलते हैं, उनके पास सामान्य पर्यटकों की तरह नहीं, बल्कि एक प्रोफेशनल फोटोग्राफर की तरह कैमरों और अलग-अलग लेंसों का पूरा साजो-सामान होता है।
“मैं जंगल की कहानी कैमरे में कैद करता हूँ।” — डॉ. शरद कुमार ब्यास

उन्हें जंगलों में पक्षियों और जंगली जीवों की फोटोग्राफी का ऐसा ‘जुनून’ है कि उनके लिए हर तस्वीर एक कहानी कहती है। उनकी बातों से साफ झलकता है कि न्याय, कविता और प्रकृति—इन तीनों ही क्षेत्रों के प्रति उनकी दृष्टि कितनी संवेदनशील और समर्पित है।
अक्सर कहा जाता है कि संस्कार और विरासत केवल संपत्ति की नहीं, बल्कि मूल्यों और आदर्शों की होती है। राजस्थान न्यायिक सेवा (RJS) में कार्यरत डॉ. शरद कुमार ब्यास का परिवार इस कहावत का जीवंत उदाहरण है। हाल ही में एक निजी मुलाकात के दौरान डॉ. ब्यास ने अपने जीवन के अनछुए पहलुओं, न्यायिक यात्रा और अपने रचनात्मक जुनून को साझा किया।

न्याय के प्रति समर्पित ‘जज परिवार’
डॉ. शरद कुमार ब्यास और उनकी धर्मपत्नी योगिता ब्यास वर्तमान में चूरू में एडिशनल सेशन जज के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। न्याय के प्रति यह निष्ठा उन्हें विरासत में मिली है। उनके पिता अशोक कुमार ब्यास, जो स्वयं मेट्रो कोर्ट से जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, पूरे परिवार के लिए प्रेरणा स्रोत रहे हैं।
केवल शरद ही नहीं, बल्कि उनकी बहन स्वाति ब्यास ने भी राजस्थान न्यायिक सेवा में प्रथम स्थान (टॉपर) प्राप्त कर परिवार का मान बढ़ाया। स्वाति वर्तमान में चाकसू में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पद पर कार्यरत हैं। दिलचस्प बात यह है कि डॉ. शरद की साली (उनकी पत्नी की बहन) भी न्यायिक सेवा में जज के रूप में समाज को न्याय दिलाने का कार्य कर रही हैं। एक ही परिवार के इतने सदस्यों का उच्च न्यायिक पदों पर होना, उनकी मेहनत और ईमानदारी का परिचायक है।

संपादकीय टिप्पणी
जज डॉ. शरद कुमार ब्यास और उनका परिवार इस बात का प्रमाण है कि यदि सही मार्गदर्शन मिले, तो एक ही परिवार राष्ट्र की सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित हो सकता है। उनकी यह बहुमुखी प्रतिभा आज की युवा पीढ़ी के लिए निश्चित रूप से प्रेरणादायक है।








