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पंजाब में शराब ठेकों पर ‘महासेल’! 13% फीस घटी, फिर भी खरीदार नहीं मिल रहे।

पंजाब: शराब ठेकों की अलॉटमेंट में पेच, 13% फीस घटाने के बाद भी 17 ग्रुप अब भी खाली

एक्साइज विभाग ने 8 और ग्रुप अलॉट किए, अब ई-टेंडर के जरिए भरे जाएंगे शेष समूह; ठेकेदारों ने जताया घाटे का डर

पंजाब में शराब ठेकों की अलॉटमेंट प्रक्रिया को लेकर एक्साइज विभाग और ठेकेदारों के बीच खींचतान जारी है। विभाग ने लंबित 25 समूहों में से 8 शराब समूहों (लिकर ग्रुप) को अलॉट कर दिया है, लेकिन 17 समूह अब भी खाली पड़े हैं। विभाग ने इन समूहों में ठेकेदारों की रुचि जगाने के लिए लाइसेंस फीस में 3 प्रतिशत की ताजा कटौती की है। इस कमी के साथ ही अब तक कुल 13 प्रतिशत लाइसेंस फीस घटाई जा चुकी है, फिर भी ठेकेदार नए ग्रुप लेने से कतरा रहे हैं।

कल जारी होंगे इन क्षेत्रों के लिए ई-टेंडर

​एक्साइज विभाग ने शेष 17 समूहों के लिए ई-टेंडर प्रक्रिया का सहारा लेने का फैसला किया है। कल विभाग कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए टेंडर जारी करेगा, जिनमें शामिल हैं:

  • जालंधर: बीएमसी चौक और सोडल चौक।
  • पठानकोट: बस स्टैंड, जुगियाल और परमानंद।
  • होशियारपुर: टांडा और दसूहा।
  • अन्य: चंडीगढ़ के नए क्षेत्र, भारतगढ़, सिटी सेंटर, बलाचौर सिटी, कपूरथला-2, फगवाड़ा-2, बेगोवाल, बठिंडा-2 भारत नगर, फिरोजपुर कैंट और अबोहर सिटी-2।

ठेकेदारों की दलील: “पिछले साल हुआ भारी नुकसान”

​शराब कारोबारियों का कहना है कि पिछली एक्साइज नीति के कारण उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा था। ठेकेदारों के अनुसार, मौजूदा बाजार और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते अब इस काम में लाभ की गुंजाइश कम हो गई है। उन्होंने सरकार के सामने कुछ प्रमुख माँगें रखी हैं:

    1. अंग्रेजी शराब पर नियंत्रण: ठेकेदारों की मांग है कि राज्य में अंग्रेजी शराब की बिक्री को सीमित किया जाए और मुख्य रूप से देसी शराब के कारोबार पर ध्यान दिया जाए। उनका तर्क है कि अंग्रेजी शराब के कारण बाजार में ‘अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा’ (Unhealthy Competition) बढ़ रही है।
    2. स्थिर नीति की मांग: बार-बार फीस घटाने के बावजूद ठेकेदार संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकार को जमीनी स्तर पर मांग और बिक्री की स्थिति को देखकर एक दीर्घकालिक और स्थिर नीति बनानी चाहिए।

​”जब तक ग्राऊंड लेवल पर वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखकर नीति नहीं बनाई जाएगी, तब तक अलॉटमेंट में दिक्कतें बनी रहेंगी। बार-बार बदलाव से कारोबार में भरोसा कम होता है।”

एक प्रमुख शराब ठेकेदार

विभाग को राजस्व बढ़ने की उम्मीद

​दूसरी ओर, एक्साइज विभाग के अधिकारियों का रुख सकारात्मक है। अधिकारियों का कहना है कि ई-टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। फीस में की गई 13 प्रतिशत की कुल कटौती ठेकेदारों को राहत देने और राज्य के राजस्व को सुरक्षित करने के लिए की गई है। विभाग को उम्मीद है कि नई टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से बचे हुए 17 समूहों की अलॉटमेंट भी जल्द ही पूरी हो जाएगी और आने वाले दिनों में राजस्व लक्ष्यों को प्राप्त कर लिया जाएगा।

Ami News
Author: Ami News

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