आम आदमी की जेब पर ‘दवा’ का वार: 1 अप्रैल से महंगी होंगी 1000 से ज्यादा जरूरी दवाइयां

देश में बढ़ती महंगाई के बीच अब आम आदमी की सेहत पर भी आर्थिक बोझ बढ़ने वाला है। नए वित्त वर्ष यानी 1 अप्रैल 2026 से बुखार, मधुमेह (डायबिटीज), ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी होने जा रही है। सरकार ने आवश्यक दवाओं की कीमतों में इजाफे को मंजूरी दे दी है, जिससे करीब 1,000 से अधिक फॉर्मूलेशन महंगे हो जाएंगे।
NPPA ने दी कीमतों में बदलाव की मंजूरी
दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने वाली संस्था नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में बदलाव के आधार पर कीमतों को संशोधित करने का निर्णय लिया है। राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची (NLEM) में शामिल दवाओं के दामों में करीब 0.65% तक की बढ़ोतरी की जाएगी।

कौन-कौन सी दवाएं होंगी महंगी?
कीमतों में वृद्धि का असर उन दवाओं पर सबसे ज्यादा पड़ेगा जिनका इस्तेमाल हर घर में रोजमर्रा के तौर पर होता है:
- सामान्य बीमारियां: बुखार और दर्द के लिए उपयोग होने वाली पैरासिटामोल, इबुप्रोफेन और डिक्लोफेनाक।
- लाइफस्टाइल बीमारियां: बीपी (टेल्मिसार्टन, एमलोडिपाइन) और डायबिटीज (मेटफॉर्मिन, ग्लिमेपिराइड) की दवाएं।
- गंभीर रोग: कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग और कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं।
- अन्य: एंटीबायोटिक्स (एज़िथ्रोमाइसिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन), विटामिन C, आयरन सप्लीमेंट और महत्वपूर्ण वैक्सीन।
कितना होगा जेब पर असर?
विशेषज्ञों के अनुसार, हालांकि यह बढ़ोतरी प्रतिशत के लिहाज से बहुत कम (0.65%) है, लेकिन इसका सामूहिक असर उन मरीजों पर पड़ेगा जो क्रोनिक बीमारियों (लंबे समय तक चलने वाली बीमारी) के कारण रोजाना कई दवाओं का सेवन करते हैं।
उदाहरण के तौर पर: यदि किसी दवा की कीमत अभी 100 रुपये है, तो 1 अप्रैल से वह लगभग 100.65 रुपये में मिलेगी।

गैर-अनुसूचित दवाओं पर नजर
गौरतलब है कि जो दवाएं सरकार की ‘आवश्यक सूची’ (NLEM) में शामिल नहीं हैं, उनके दाम और भी ज्यादा बढ़ सकते हैं। दवा कंपनियों को ऐसी गैर-अनुसूचित दवाओं की कीमतों में सालाना 10% तक की वृद्धि करने की अनुमति होती है। ऐसे में स्वास्थ्य बजट का संतुलित रहना आम आदमी के लिए एक चुनौती बन सकता है।








