पंजाब के सरकारी अस्पतालों में ‘सांसों’ पर संकट: हाईकोर्ट की कड़ी फटकार
35 ऑक्सीजन प्लांट बंद होने पर नाराजगी; अदालत ने पूछा- जब प्लांट लगाए थे, तो अब चालू क्यों नहीं?

चंडीगढ़ : पंजाब के सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई की बदहाली को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के प्रति कड़ा रुख अख्तियार किया है। अदालत ने राज्य के विभिन्न जिला अस्पतालों में स्थापित 35 पीएसए (प्रेशर स्विंग एडसॉर्प्शन) ऑक्सीजन प्लांट के बंद पड़े होने पर गहरी नाराजगी जताते हुए सरकार से जवाब तलब किया है।
सरकार पर तथ्य छुपाने का आरोप
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत को झकझोरने वाले तथ्य पेश किए। याचिका में कहा गया कि जालंधर, फाजिल्का, कपूरथला और मोहाली जैसे महत्वपूर्ण जिलों में ऑक्सीजन प्लांट धूल फांक रहे हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि जालंधर में ऑक्सीजन की कमी और सप्लाई बाधित होने के कारण 3 मरीजों की जान जा चुकी है, लेकिन सरकार ने अपने हलफनामे में इन तथ्यों को छुपाने की कोशिश की।

सफाई में फंसी सरकार: सिलेंडर बनाम प्लांट
अदालत के कड़े सवालों के बीच राज्य सरकार ने दलील दी कि अस्पतालों में ऑक्सीजन की मुख्य आपूर्ति सिलेंडरों के जरिए की जा रही है। सरकार का तर्क था कि सिलेंडरों से 99% शुद्ध ऑक्सीजन मिलती है, जबकि पीएसए प्लांट केवल 90-96% शुद्धता ही दे पाते हैं।
हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी
सरकार की दलील पर अदालत ने सवाल उठाया कि— “जब इन प्लांट को स्थापित किया गया था, तब शुद्धता का मानक क्या था? अगर ये अनुपयोगी थे, तो जनता का पैसा खर्च कर इन्हें लगाया ही क्यों गया? और अगर लगाए गए हैं, तो इन्हें चालू क्यों नहीं रखा जा रहा?”

अदालत ने मांगे दो मुख्य जवाब:
- पॉलिसी का अभाव: क्या राज्य के पास ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर कोई स्पष्ट राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय नीति (Policy) है?
- रिकॉर्ड पर पेशी: अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक ऑक्सीजन सप्लाई से जुड़ी पूरी नीति को रिकॉर्ड पर पेश किया जाए।
- 35 प्लांट: प्रदेश के विभिन्न जिलों में बंद पड़े पीएसए ऑक्सीजन प्लांट की संख्या।
- 3 मौतें: जालंधर में कथित रूप से ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतें, जिन्हें छिपाने का आरोप।
- 90-96% शुद्धता: पीएसए प्लांट से मिलने वाली ऑक्सीजन का स्तर, जिसे सरकार ने कम बताया।








