विशेष पूजन: सुख-समृद्धि और आरोग्य के लिए आज करें माँ कात्यायनी की आराधना, शहद का भोग लगाना शुभ।

कात्यायनी का स्वरूप
माँ कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत चमकीला और दिव्य है।
- वाहन: सिंह (शेर)।
- भुजाएँ: माँ की चार भुजाएँ हैं। दाईं ओर का ऊपर वाला हाथ ‘अभय मुद्रा’ में और नीचे वाला हाथ ‘वरद मुद्रा’ में रहता है। बाईं ओर के एक हाथ में तलवार और दूसरे में कमल का पुष्प सुशोभित है।
- रंग: इनका स्वर्ण जैसा सुनहरा रंग भक्तों को शांति और शक्ति प्रदान करता है।

पौराणिक कथा (महत्व)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने भगवती परांबा की कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी कि माँ उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। माँ ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की और उनके घर जन्म लिया, जिसके कारण उनका नाम ‘कात्यायनी’ पड़ा।
जब महिषासुर का अत्याचार बढ़ गया, तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अपने तेज के अंश से माँ कात्यायनी को उत्पन्न किया। माँ कात्यायनी ने ही अपनी वीरता से महिषासुर का वध कर तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त कराया था।
पूजा विधि और मंत्र
छठे नवरात्रि पर भक्त सुबह जल्दी स्नान करके लाल या पीले वस्त्र धारण करते हैं। माँ को शहद का भोग लगाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

माँ कात्यायनी की पूजा का फल
- विवाह में बाधा: जिन जातकों के विवाह में बाधाएं आ रही हों, उनके लिए माँ कात्यायनी की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
- शत्रु विजय: माता के आशीर्वाद से भय और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
- सफलता: साधक का मन ‘आज्ञा चक्र’ में स्थित होता है, जिससे उसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है।








