मणिकर्ण घाटी में बारिश का तांडव: भूस्खलन से बरशैणी मार्ग ठप, घर्टीगढ़ में फिर थमी रफ्तार

कुल्लू/मणिकर्ण: हिमाचल प्रदेश की मणिकर्ण घाटी में प्रकृति का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीती रात हुई मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर घाटी के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारी बारिश के कारण क्षेत्र के कई हिस्सों में भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे प्रमुख संपर्क मार्गों पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है।

घर्टीगढ़ बना मुसीबत का केंद्र
सबसे विकट स्थिति मणिकर्ण-बरशैणी मार्ग पर देखने को मिल रही है। यहाँ घर्टीगढ़ के पास पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें सड़क पर आ गिरी हैं। गौरतलब है कि यह क्षेत्र पिछले साल नवंबर से ही भूस्खलन के प्रति बेहद संवेदनशील बना हुआ है। हाल ही में विभाग ने इस मार्ग को कड़ी मशक्कत के बाद यातायात के लिए खोला था, लेकिन ताज़ा बारिश ने विभाग की मेहनत पर पानी फेरते हुए फिर से वही पुरानी स्थिति पैदा कर दी है।
युद्ध स्तर पर बहाली का कार्य जारी
लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमें सूचना मिलते ही मशीनों के साथ मौके पर तैनात हो गई हैं। विभाग के अनुसार:
- घाटी के कुछ छोटे लिंक रोड से मलबा हटाकर उन्हें यातायात के लिए बहाल कर दिया गया है।
- घर्टीगढ़ जैसे क्षेत्रों में मलबे की मात्रा इतनी अधिक है कि मुख्य मार्ग को खोलने में अभी और समय लग सकता है।

पर्यटक और स्थानीय निवासी परेशान
सड़क मार्ग अवरुद्ध होने के कारण ऊपरी मणिकर्ण घाटी का संपर्क मुख्य केंद्रों से पूरी तरह कट गया है। इससे न केवल स्थानीय ग्रामीणों को दैनिक कार्यों के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है,
प्रशासन की चेतावनी:
स्थानीय प्रशासन ने खराब मौसम और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों और पर्यटकों को नदी-नालों के पास न जाने और संवेदनशील रास्तों पर यात्रा न करने की सख्त सलाह दी है।








