हिमाचल में व्यावसायिक एलपीजी की सप्लाई ठप: बद्दी-बरोटीवाला सहित पूरे प्रदेश में हाहाकार

शिमला/बद्दी: हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक गलियारे और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर ईंधन संकट के बादल गहरा गए हैं। केंद्र सरकार के ताजा निर्देशों के बाद प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक हब बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (BBN) सहित पूरे राज्य में कमर्शियल एलपीजी सिलिंडरों की सप्लाई अनिश्चितकाल के लिए रोक दी गई है। इस फैसले से फार्मा से लेकर होटल उद्योग तक में हड़कंप मच गया है।
घरेलू उपभोक्ता प्राथमिकता, युद्ध का साया मुख्य कारण
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने यह कड़ा कदम दो प्रमुख कारणों से उठाया है:
- घरेलू आपूर्ति को सुरक्षा: आम जनता के घरों में इस्तेमाल होने वाली गैस की निरंतरता सुनिश्चित करना।
- अंतरराष्ट्रीय तनाव: ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका, जिससे गैस की कमी का खतरा मंडरा रहा है।
इन पर लगा प्रतिबंध
फिलहाल गैस कंपनियों ने 19 किलो, 47.5 किलो और 425 किलो के भारी व्यावसायिक सिलिंडरों की रिफिलिंग और वितरण पर पूरी तरह रोक लगा दी है।

उद्योगों और छोटे व्यापारियों पर ‘दोहरी मार’
हिमाचल के औद्योगिक केंद्र BBN में इसका सबसे व्यापक असर देखने को मिल रहा है। फार्मा, पैकेजिंग, फूड प्रोसेसिंग और गत्ता निर्माण जैसे उद्योगों में ईंधन के रूप में एलपीजी का बड़े पैमाने पर प्रयोग होता है। सप्लाई रुकने से उत्पादन ठप होने की कगार पर है।
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- होटल और ढाबा संचालक परेशान: प्रदेश भर के होटल और ढाबा संचालकों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। संचालकों का कहना है कि बिना व्यावसायिक गैस के कामकाज जारी रखना असंभव है।
“हमें केंद्र से स्पष्ट निर्देश मिले हैं कि फिलहाल कमर्शियल रिफिलिंग पर रोक लगाई जाए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है।”
— अधिकारी, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC)

प्रशासनिक स्थिति: लिखित आदेश का इंतजार
परवाणू में गैस कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटरों के बीच इस विषय पर उच्च स्तरीय बैठक हुई है। हालांकि, इंडियन ऑयल के अधिकारियों ने इस बंदी की पुष्टि की है, लेकिन राज्य के नागरिक आपूर्ति विभाग का कहना है कि उन्हें अभी तक केंद्र से लिखित आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं।
फिलहाल, रिफिलिंग दोबारा कब शुरू होगी, इसे लेकर कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं है, जिससे प्रदेश के व्यापारिक वर्ग में अनिश्चितता और रोष का माहौल है।








