पठानकोट: कंडी क्षेत्र के लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा सरकारी भेड़ फार्म
250 एकड़ में फैला यह फार्म 64 वर्षों से दे रहा है रोजगार; उत्तम नस्ल की भेड़ों से पशुपालकों की बदल रही किस्मत

पठानकोट: पठानकोट के पहाड़ी और कंडी क्षेत्र में जहाँ रोजगार के साधन सीमित हैं, वहीं रावी दरिया और पहाड़ियों की गोद में स्थित सरकारी भेड़ फार्म स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक संबल बना हुआ है। पशुपालन विभाग द्वारा 1962 में स्थापित यह फार्म पिछले 64 वर्षों से न केवल क्षेत्र के लोगों को रोजगार मुहैया करवा रहा है, बल्कि पशुपालन के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और उत्तम नस्लें भी प्रदान कर रहा है।

जिला सत्र न्यायाधीश ने किया दौरा
इस फार्म की प्राकृतिक सुंदरता और यहाँ के अनुशासित कामकाज को देखने के लिए अक्सर उच्च अधिकारी यहाँ पहुँचते हैं। हाल ही में पठानकोट के जिला एवं सत्र न्यायाधीश जतिंदर पाल सिंह खुरमी ने इस भेड़ फार्म का दौरा किया। उन्होंने फार्म की कार्यप्रणाली का जायजा लिया और विभाग के प्रयासों की सराहना की।

उत्तम नस्ल और स्वरोजगार पर जोर
पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विजय कुमार और सहायक डायरेक्टर डॉ. सुधीर कुमार ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि:
- स्थापना: यह फार्म 1962 में 250 एकड़ भूमि पर स्थापित किया गया था।
- उन्नत नस्लें: यहाँ विशेष रूप से फ्रेंच नस्ल की भेड़ें पाली जा रही हैं। इन भेड़ों के ‘नर’ (Rams) को पशुपालकों को बेचा जाता है ताकि वे अपनी भेड़ों की नस्ल में सुधार कर सकें।
- बाजार की मांग: उन्होंने बताया कि इन भेड़ों के मांस की जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में भारी मांग है, जिससे पशुपालक अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

सरकारी सहायता और ऋण की सुविधा
अधिकारियों ने बताया कि सरकार द्वारा भेड़ पालन को बढ़ावा देने के लिए ऋण (Loan) की सुविधा भी प्रदान की जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि कंडी क्षेत्र के लोग अपना खुद का फार्म खोल सकें और अपने परिवार का बेहतर पालन-पोषण कर सकें।
”यह फार्म न केवल पशुपालकों को प्रोत्साहित करता है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी बड़ी भूमिका निभा रहा है। हम लोगों से अपील करते हैं कि वे सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।” — डॉ. विजय कुमार, डिप्टी डायरेक्टर।








