किसानों और पशुपालकों की आर्थिकी सुदृढ़ करना सरकार का मुख्य लक्ष्य: प्रो. चंद्र कुमार

ज्वाली में एक दिवसीय पशुपालक जागरूकता एवं संवाद शिविर का आयोजन; आधुनिक तकनीकों से आय बढ़ाने पर जोर
ज्वाली : प्रदेश सरकार किसानों और पशुपालकों को वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध करवाकर उनकी आय में वृद्धि करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह बात कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने ज्वाली में आयोजित एक दिवसीय ‘पशुपालक जागरूकता एवं संवाद शिविर’ (पशु स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम) के दौरान बतौर मुख्य अतिथि कही। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश वूल फेडरेशन के अध्यक्ष मनोज कुमार विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
पशुपालकों के लिए बड़ी घोषणाएं और उपलब्धियां
कृषि मंत्री ने अपने संबोधन में सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का खाका पेश किया:
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- दूध खरीद दर: प्रदेश सरकार अब पशुपालकों से भैंस का दूध 61 रुपये और गाय का दूध 51 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद रही है।
- गोबर खरीद: प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से ऑर्गेनिक गोबर खाद की खरीद की जा रही है।
- ढगवार दुग्ध संयंत्र: कांगड़ा जिले के ढगवार में 250 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक मिल्क प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
- MSP पर फसल खरीद: प्राकृतिक रूप से उगाई गई मक्की, गेहूं, जौ और कच्ची हल्दी को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा जा रहा है।
”मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में पशुपालकों को सशक्त बनाना हमारी प्राथमिकता है। अब पंचायत स्तर पर ऐसे शिविर लगाए जाएंगे ताकि वैज्ञानिक तकनीकें सीधे पशुपालकों के द्वार तक पहुंच सकें।”
— प्रो. चंद्र कुमार, कृषि मंत्री

विशेषज्ञों ने दी वैज्ञानिक सलाह
शिविर में कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर और विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पशुओं के संतुलित आहार, नवजात बछड़ों की देखभाल, टीकाकरण और प्रजनन विकारों पर विस्तृत जानकारी दी। संयुक्त निदेशक डॉ. अजय चौधरी ने पशुधन प्रबंधन पर बल दिया, वहीं उपनिदेशक डॉ. सीमा गुलेरिया ने बताया कि कांगड़ा जिले में अब तक:
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- 1.72 लाख गाय-भैंसों का टीकाकरण।
- 25 हजार भेड़-बकरियों का टीकाकरण।
- 11 हजार सूअरों का टीकाकरण किया जा चुका है।
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सम्मान और मार्गदर्शन
कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री ने पशुपालन मार्गदर्शिका का विमोचन किया। साथ ही, 15 प्रगतिशील पशुपालकों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया और लकी ड्रा के माध्यम से 10 पशुपालकों को ‘पशु कैल्शियम किट’ प्रदान की गई। वूल फेडरेशन के अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि भेड़-बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसके सुधार के लिए फेडरेशन निरंतर कार्यरत है।

उपस्थिति:
इस अवसर पर एसडीएम नरेंद्र जरियाल, संयुक्त निदेशक राहुल कटोच, अशोक पांडा (वाइस चेयरमैन, कृषि वि.वि.), मिल्क फेडरेशन के यूनिट हेड अखिलेश पराशर, और विभिन्न विभागों के अधिकारियों सहित भारी संख्या में स्थानीय पशुपालक मौजूद रहे।








