अब प्रदेश की बंजर धरती उगलेगी सोना: ‘एचपीशिवा’ से बदलेगी फतेहपुर के किसानों की तकदीर

फतेहपुर में 70 हेक्टेयर में पहले चरण का आगाज, 115 हेक्टेयर दूसरे चरण के लिए चयनित; 10 हजार कनाल भूमि को हरा-भरा बनाने का लक्ष्य।
फतेहपुर: हिमाचल प्रदेश के फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में बागवानी के क्षेत्र में एक नई क्रांति का सूत्रपात हो चुका है। बागवानी विभाग (Horticulture Department) द्वारा संचालित HP SHIVA Project के तहत क्षेत्र की बंजर पड़ी जमीन अब जल्द ही ‘सोना’ उगलेगी। फतेहपुर के बेह और मच्छोट क्लस्टर में भूमि पूजन के साथ ही इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत कर दी गई है।
दो चरणों में होगा कायाकल्प
परियोजना के तहत फतेहपुर में विकास कार्य को दो चरणों में बांटा गया है:
- प्रथम चरण: 70 हेक्टेयर भूमि पर काम शुरू हो चुका है।
- द्वितीय चरण: इसके लिए 115 हेक्टेयर भूमि का चयन किया गया है।
- बड़ा लक्ष्य: विभाग का लक्ष्य वर्ष 2028 तक फतेहपुर की 10 हजार कनाल भूमि पर आधुनिक फल बगीचे विकसित करना है।
आधुनिक बागवानी और तकनीक का संगम
सूखी और बंजर जमीन, जो किसानों के लिए चिंता का विषय थी, अब समृद्धि का आधार बनेगी। इस प्रोजेक्ट की कुछ मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- उच्च गुणवत्ता वाले फल: बगीचों में मुख्य रूप से आम, अमरूद, संतरा और अनार के पौधे लगाए जाएंगे। इसके साथ ही औषधीय खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
- ड्रिप इरिगेशन: पानी की कमी से निपटने के लिए टपक सिंचाई प्रणाली का उपयोग होगा, जिससे पानी की हर बूंद का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा।
- सौर ऊर्जा बाड़: जंगली जानवरों से फसल की सुरक्षा के लिए खेतों के चारों ओर सौर ऊर्जा चालित (Solar Fencing) बाड़ लगाई जाएगी।
- मालिकाना हक: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बगीचा किसान की अपनी जमीन पर होगा और उस पर पूरा अधिकार भी किसान का ही रहेगा।

बजट और सहयोग
इस परियोजना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग मिल रहा है। कुल लागत का 80 प्रतिशत हिस्सा एशियाई विकास बैंक (Asian Development Bank) वहन कर रहा है, जबकि शेष 20 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा खर्च किया जा रहा है। सरकार किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और उच्च गुणवत्ता वाली पौध सामग्री उपलब्ध करवा रही है।
विधायक की कलम से
विधायक एवं राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष (कैबिनेट रैंक) भवानी सिंह पठानिया ने कहा:
”एचपीशिवा परियोजना किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगी। हम चाहते हैं कि किसान पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक बागवानी को अपनाएं। सरकार उन्हें हर संभव संसाधन और तकनीकी सहयोग दे रही है ताकि उनकी आय कई गुना बढ़ सके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।”

निष्कर्ष
फतेहपुर की बंजर धरती पर हरियाली का यह सपना अब हकीकत में बदलता दिख रहा है। उम्मीद है कि 2028 तक जब 10 हजार कनाल भूमि फलों से लद जाएगी, तो यह न केवल किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगी बल्कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था में भी नया अध्याय जोड़ेगी।








