आज यानी 3 मार्च 2026 का दिन धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज एक तरफ जहाँ पूरा भारत होलिका दहन का उत्सव मना रहा है, वहीं आकाश में दुर्लभ पूर्ण चंद्र ग्रहण का नजारा भी दिखाई दे रहा है।

1. राष्ट्रीय महत्व: होलिका दहन (फाल्गुन पूर्णिमा)
भारत में आज होलिका दहन मनाया जा रहा है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
- धार्मिक महत्व: आज के दिन भक्त प्रहलाद की रक्षा और होलिका के अंत की स्मृति में अग्नि जलाई जाती है। यह त्योहार आपसी भाईचारे और शुद्धिकरण का संदेश देता है।
- होलाष्टक की समाप्ति: आज के दहन के साथ ही 8 दिनों से चला आ रहा ‘होलाष्टक’ समाप्त हो जाएगा और कल यानी 4 मार्च को रंगों वाली होली (धुलंडी) खेली जाएगी।
2. खगोलीय घटना: साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण
आज 3 मार्च 2026 को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) लग रहा है।
- ब्लड मून (Blood Moon): इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में छिप जाएगा और गहरा लाल दिखाई देगा, जिसे ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।
- भारत में दृश्यता: यह ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई दे रहा है। ग्रहण का सूतक काल सुबह से ही प्रभावी है, जिस कारण कई मंदिरों के कपाट बंद रखे गए हैं और धार्मिक अनुष्ठान ग्रहण के बाद ही संपन्न होंगे।
3. अंतर्राष्ट्रीय दिवस (International Days)
विश्व वन्यजीव दिवस (World Wildlife Day)
संयुक्त राष्ट्र द्वारा हर साल 3 मार्च को दुनिया भर के जंगली जीवों और वनस्पतियों के संरक्षण के लिए यह दिवस मनाया जाता है।
- 2026 की थीम: “औषधीय और सुगंधित पौधे: स्वास्थ्य, विरासत और आजीविका का संरक्षण” (Medicinal and Aromatic Plants: Conserving Health, Heritage and Livelihoods)।
- उद्देश्य: इस वर्ष का ध्यान उन पौधों पर है जिनका उपयोग दवाओं और सौंदर्य प्रसाधनों में होता है, ताकि उनके अत्यधिक दोहन को रोका जा सके।
विश्व श्रवण दिवस (World Hearing Day)
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा बहरेपन और सुनने की शक्ति को बचाने के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए यह दिन मनाया जाता है।
- 2026 की थीम: “समुदायों से कक्षाओं तक: सभी बच्चों के लिए श्रवण देखभाल” (From communities to classrooms: hearing care for all children)।
- विशेष: इस वर्ष बच्चों में समय पर सुनने की समस्या की पहचान और उपचार पर जोर दिया जा रहा है।
4. अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
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- बजट वेबिनार: भारत के प्रधानमंत्री आज “सतत और सशक्त आर्थिक विकास” विषय पर बजट-पश्चात वेबिनार को संबोधित कर रहे हैं, जो देश की आर्थिक दिशा के लिए महत्वपूर्ण है।
- टाटा स्टील स्थापना दिवस: आज के ही दिन 1839 में जमशेदजी टाटा का जन्म हुआ था, जिन्हें भारतीय उद्योग का जनक माना जाता है। जमशेदपुर में आज “फाउंडर्स डे” धूमधाम से मनाया जाता है।
विशेष नोट: आज चंद्र ग्रहण के कारण होलिका दहन के शुभ मुहूर्त में कुछ बदलाव हो सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण समाप्त होने के बाद ही मुख्य उत्सव मनाना उचित माना गया ।
फाल्गुन पूर्णिमा पर ‘ब्लड मून’ का साया, जानें पंचांग और ग्रहण का सटीक समय
नई दिल्ली/वाराणसी | आज 3 मार्च 2026 का दिन भारतीय जनमानस के लिए भक्ति और सावधानी का मिश्रण लेकर आया है। आज जहाँ बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व ‘होलिका दहन’ मनाया जाना है, वहीं आकाश में दुर्लभ ‘ब्लड मून’ (पूर्ण चंद्र ग्रहण) का नजारा भी दिखेगा। इस खगोलीय घटना के कारण आज सूतक काल प्रभावी रहेगा, जिससे पूजा-पाठ और होलिका दहन के समय में विशेष बदलाव किए गए हैं।
🗓️ आज का पंचांग: एक नजर में
- तिथि: फाल्गुन शुक्ल पक्ष, पूर्णिमा (सायं 05:07 तक, इसके बाद प्रतिपदा)।
- नक्षत्र: मघा (सुबह 07:31 तक), तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी।
- योग: सुकर्मा (सुबह 10:24 तक), उसके बाद धृति योग।
- करण: बव (शाम 05:07 तक), फिर बालव।
- चंद्र राशि: सिंह (आज चंद्रमा सिंह राशि में ही गोचर करेंगे)।
🌑 वर्ष 2026 का प्रथम चंद्र ग्रहण (समय और प्रभाव)
आज का चंद्र ग्रहण भारत के अधिकांश हिस्सों में ग्रस्तोदित (चंद्रमा उगते समय ग्रहण की अवस्था में होना) रूप में दिखाई देगा।
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- ग्रहण का आरंभ: दोपहर 03:20 बजे से।
- पूर्ण चंद्र ग्रहण (टोटैलिटी): शाम 04:34 से 05:32 बजे तक।
- ग्रहण का मोक्ष (समाप्ति): शाम 06:47 बजे।
- सूतक काल: शास्त्रों के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले शुरू होता है। अतः आज सुबह 06:20 बजे से ही सूतक लग चुका है, जो शाम 06:47 बजे ग्रहण समाप्ति के बाद ही खत्म होगा।
विशेष: ग्रहण के दौरान चंद्रमा का रंग गहरा लाल यानी ‘ब्लड मून’ की तरह दिखेगा। सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में ग्रहण लगने के कारण इस राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
🔥 होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
चंद्र ग्रहण और सूतक काल के कारण आज होलिका दहन के समय में विशेष सावधानी रखी जा रही है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, ग्रहण काल में अग्नि प्रज्वलित करना वर्जित है।
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- होलिका दहन का श्रेष्ठ समय: ग्रहण के मोक्ष के बाद यानी शाम 06:50 बजे से रात 08:50 बजे तक।
- नोट: कुछ विद्वानों का मत है कि सूतक लगने से पहले (2 मार्च की मध्यरात्रि) कई स्थानों पर दहन संपन्न हो चुका है, लेकिन आज शाम ग्रहण शुद्धि के बाद दहन करना अत्यंत फलदायी रहेगा।
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⚠️ क्या करें और क्या न करें?
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- भोजन: सूतक काल में भोजन करना वर्जित है (बीमार, वृद्ध और बच्चों को छूट है)। खाने-पीने की वस्तुओं में तुलसी के पत्ते (कुश) डाल दें।
- पूजा-पाठ: सूतक के दौरान मूर्तियों को स्पर्श न करें। ग्रहण के समय मानसिक जाप (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या महामृत्युंजय मंत्र) करें।
- गर्भवती महिलाएँ: ग्रहण काल के दौरान नुकीली वस्तुओं का प्रयोग न करें और बाहर निकलने से बचें।
- स्नान-दान: शाम 06:47 बजे ग्रहण समाप्त होने के बाद पवित्र नदियों या घर में गंगाजल डालकर स्नान करें और सफेद वस्तुओं (चावल, चीनी, दूध) का दान करें।
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🔱 आज के अन्य पर्व
आज श्री चैतन्य महाप्रभु की जयंती भी है। इसके अलावा आज से गणगौर पूजा का प्रारंभ हो रहा है और होलाष्टक की समाप्ति के साथ ही कल, 4 मार्च को रंगों वाली होली (धुलंडी) हर्षोल्लास के साथ खेली जाएगी।








