शिमला पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 25 लाख की ठगी करने वाली ‘डिजिटल ठग’ पंजाब से गिरफ्तार

शिमला की बालूगंज पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वर्क परमिट दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले की मुख्य आरोपी महिला, मंजू कुमारी को पंजाब के खरड़ (शिवालिक सिटी) से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपी महिला ने तकनीकी चालाकियों का सहारा लेकर लंबे समय तक पुलिस को छकाया, लेकिन अंततः कानून के लंबे हाथों ने उसे दबोच लिया।
कनाडा भेजने के नाम पर ऐंठे 25 लाख रुपये
धोखाधड़ी का यह सनसनीखेज मामला साल 2025 में दर्ज हुआ था। शिकायतकर्ता के अनुसार, उनकी बहन ‘भावना’ को कनाडा का वीजा और वर्क परमिट दिलाने का झांसा दिया गया था। शातिर ठगों ने कागजी कार्रवाई और अन्य खर्चों के बहाने पीड़ित परिवार से किस्तों में कुल 25 लाख रुपये ठग लिए। जब समय बीतने पर न वीजा मिला और न ही आरोपियों ने पैसे लौटाए, तब पीड़ितों ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।

पुलिस को चकमा देने के लिए अपनाए हाई-टेक तरीके
आरोपी मंजू कुमारी और उसका गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा था। पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए वे निम्नलिखित हथकंडे अपना रहे थे:
- लगातार सिम कार्ड बदलना: ट्रैकिंग से बचने के लिए आरोपी हर कुछ दिनों में मोबाइल सिम बदल देते थे।
- केवल व्हाट्सएप कॉल का उपयोग: वे सामान्य नेटवर्क कॉल के बजाय केवल इंटरनेट कॉलिंग का प्रयोग करते थे ताकि पुलिस उनकी लोकेशन ट्रेस न कर सके।
- लोकेशन बदलना: पुलिस ने इससे पहले पंजाब और हरियाणा के कई ठिकानों पर दबिश दी थी, लेकिन आरोपी हर बार भूमिगत हो जाते थे।
ऐसे हुई ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
शिमला के एसएसपी गौरव सिंह के निर्देश पर गठित एक विशेष टीम ने 22 फरवरी को इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। पुलिस ने गहन तकनीकी निगरानी (Surveillance) और डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर आरोपी की सटीक लोकेशन चंडीगढ़ के पास खरड़ में ट्रैक की। शिवालिक सिटी स्थित एक फ्लैट पर अचानक छापेमारी कर पुलिस ने मंजू कुमारी को हिरासत में ले लिया।

एसएसपी का बयान: अन्य गिरफ्तारियां संभव
एसएसपी शिमला ने पुष्टि की है कि आरोपी से पूछताछ जारी है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके बैंक खातों के लेन-देन की जांच कर रही है। पुलिस को अंदेशा है कि यह गिरोह राज्य के कई अन्य लोगों को भी अपनी ठगी का शिकार बना चुका है।








