कांगड़ा में अंतरराज्यीय बच्चा तस्करी और ठगी गिरोह का पर्दाफाश; पंजाब से दो गिरफ्तार
गोद दिलाने के नाम पर ऐंठ रहे थे पैसे, देहरा पुलिस ने बिछाया जाल, जालंधर और बटाला से हुई गिरफ्तारियां।

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के औद्योगिक कस्बे संसारपुर टैरेस में पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय बच्चा तस्करी और ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करने में सफलता हासिल की है। पुलिस ने इस मामले में पंजाब के अलग-अलग क्षेत्रों से एक पुरुष और एक महिला को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह कथित तौर पर बेसहारा बच्चों को गोद दिलाने का झांसा देकर लोगों से मोटी रकम वसूलने और तस्करी का नेटवर्क चलाने का काम कर रहा था।
सतर्कता से खुला राज
इस पूरे गोरखधंधे का खुलासा तब हुआ जब संसारपुर टैरेस निवासी रोहित कुमार और उनकी पत्नी ने बच्चा गोद लेने की इच्छा जताई। गिरोह के सदस्य दीपक कुमार ने उनसे संपर्क किया और बच्चा दिलाने के बदले 23,500 रुपये की मांग की। रोहित ने भरोसे में आकर 10,000 रुपये आरोपी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। हालांकि, बातचीत के दौरान रोहित को आरोपियों के व्यवहार और सौदेबाजी पर शक हुआ। ठगी की आशंका होते ही रोहित ने तुरंत इसकी सूचना डाडासीबा के डीएसपी राज कुमार को दी।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी देहरा मयंक चौधरी के निर्देश पर थाना प्रभारी संजय की अगुवाई में एक विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने बैंक ट्रांजेक्शन और तकनीकी साक्ष्यों (लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड्स) का पीछा किया।
- पहली गिरफ्तारी: मुख्य आरोपी 40 वर्षीय दीपक कुमार (निवासी ओल्ड कांगड़ा) को पंजाब के जालंधर से गिरफ्तार किया गया।
- दूसरी गिरफ्तारी: दीपक से पूछताछ के बाद पुलिस ने 47 वर्षीय रितु (निवासी बटाला, पंजाब) को दबोचा, जो इस नेटवर्क में बच्चों की व्यवस्था करने और उन्हें बेचने का काम करती थी।
बड़े नेटवर्क की आशंका
एसपी देहरा मयंक चौधरी ने बताया कि प्राथमिक जांच में यह केवल ठगी का मामला नहीं लग रहा है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित बच्चा तस्करी गिरोह होने के पुख्ता सबूत मिल रहे हैं।
”पुलिस इस नेटवर्क की हर कड़ी को खंगाल रही है। मुख्य आरोपी दीपक कुमार को अदालत ने छह दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है, जबकि महिला आरोपी को शनिवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। हमें उम्मीद है कि पूछताछ में कुछ और बड़े नामों और मामलों का खुलासा होगा।” — मयंक चौधरी, एसपी देहरा

आगामी कार्रवाई
पुलिस अब उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है जिनके जरिए आरोपी संपर्क में थे। पुलिस को अंदेशा है कि यह गिरोह पहले भी कई लोगों को अपना शिकार बना चुका है और इनके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां संभव हैं।








