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देवभूमि में अब ‘शहनाई’ से पहले ‘ट्रेनिंग’: टूटते परिवारों को बचाने के लिए शुरू होगी ‘तेरे मेरे सपने’ पहल

हिमाचल में अब शहनाई बजने से पहले मिलेगी ‘शादी की ट्रेनिंग’, टूटने से बचेंगे घर

शिमला/कांगड़ा देवभूमि हिमाचल में अब शादियों का स्वरूप केवल उत्सव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में सुदृढ़ किया जाएगा। प्रदेश में घरेलू हिंसा के बढ़ते ग्राफ और बिखरते परिवारों को बचाने के लिए सुक्खू सरकार एक अनूठी पहल करने जा रही है। अब शादी के बंधन में बंधने से पहले युवक-युवतियों को ‘शादी की ट्रेनिंग’ दी जाएगी।

‘तेरे मेरे सपने’: टूटे रिश्तों को जोड़ने की नई उम्मीद राष्ट्रीय महिला आयोग के निर्देशों पर प्रदेश में ‘तेरे मेरे सपने’ नाम से एक महत्वाकांक्षी अभियान शुरू किया जा रहा है। इसके तहत राज्य के हर जिले में ‘प्री-मैरिटल कम्युनिकेशन सेंटर’ (विवाह पूर्व संवाद केंद्र) स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य युवाओं को वैवाहिक जीवन की चुनौतियों, आपसी तालमेल और जिम्मेदारियों के प्रति मानसिक रूप से तैयार करना है।

कांगड़ा में घरेलू हिंसा में 10% का उछाल

आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में घरेलू कलह की स्थिति चिंताजनक है। अकेले कांगड़ा जिले की बात करें तो:

  • नवंबर 2025-26 तक: 546 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
  • पिछले सत्र (2024-25): कुल 798 मामले सामने आए थे।
  • वर्तमान स्थिति: विभाग ने 275 जोड़ों का समझौता कराया है, जबकि 139 केस अभी भी अदालतों के चक्कर काट रहे हैं।

झगड़ों के पीछे दो ‘विलेन’: नशा और अपेक्षाएं महिला एवं बाल विकास विभाग के विश्लेषण में सामने आया है कि घरों में कड़वाहट की सबसे बड़ी वजह नशा और एक-दूसरे से अत्यधिक उम्मीदें रखना है। जिलेवार विश्लेषण में देहरा ब्लॉक सबसे संवेदनशील पाया गया है, जबकि नगरोटा सूरियां में सबसे कम मामले हैं।

कैसे काम करेंगे संवाद केंद्र? इन केंद्रों का संचालन महिला एवं बाल विकास विभाग करेगा। मुख्य सचिव के आदेशानुसार, इन केंद्रों में युवाओं को निम्नलिखित पहलुओं पर प्रशिक्षित किया जाएगा:

    1. संवाद कौशल: कठिन समय में एक-दूसरे से बात कैसे करें।
    2. जिम्मेदारियों का बंटवारा: घर और बाहर के कामों में सामंजस्य।
    3. धैर्य और सहनशीलता: विपरीत परिस्थितियों में झगड़ने के बजाय समाधान ढूंढना।

“राष्ट्रीय महिला आयोग के साथ चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया है। हमारा मकसद युवाओं को वैवाहिक जीवन की चुनौतियों के प्रति जागरूक करना है ताकि वे एक मजबूत नींव के साथ नई जिंदगी शुरू कर सकें।” > — पंकज ललित, निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग

निष्कर्ष हिमाचल सरकार की यह पहल केवल कानूनी कार्यवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक मनोवैज्ञानिक प्रयास है। यदि शादी से पहले ही कड़वाहट की वजहों को खत्म कर दिया जाए, तो भविष्य में होने वाले विवादों और हिंसा को जड़ से मिटाया जा सकता है।

Ami News
Author: Ami News

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