डिजिटल इंडिया के दौर में ‘नेटवर्क’ को तरस रहे सलूणी के सीमावर्ती गांव, सुरक्षा पर भी सवाल

चंबा/सलूणी (जितेंद्र मेहरा): आज हमारा देश चांद के बाद मंगल ग्रह तक की दूरी तय कर चुका है, लेकिन जिला चंबा के उपमंडल सलूणी के कई दूरदराज क्षेत्र आज भी आधुनिक युग की सबसे बुनियादी जरूरत ‘मोबाइल नेटवर्क’ से महरूम हैं। डिजिटल इंडिया के इस दौर में इन क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी का न होना प्रशासन और सरकार के दावों की पोल खोल रहा है।

सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील है क्षेत्र
गौरतलब है कि सलूणी उपमंडल के तहत डलहौजी और चुराह विधानसभा क्षेत्र को जोड़ने वाले कई इलाके जम्मू-कश्मीर की सीमा से सटे हैं। ऊंचाई पर स्थित इन इलाकों में अक्सर आतंकवादी गतिविधियां और घुसपैठ की आशंका बनी रहती है। ऐसे में नेटवर्क न होने के कारण आपातकालीन स्थिति में स्थानीय लोग या सुरक्षा बल किसी भी सरकारी संस्था या मुख्यालय से तुरंत संपर्क नहीं कर पाते, जो सुरक्षा की दृष्टि से एक बड़ा खतरा है।

ग्रामीणों की मुश्किलें: न पढ़ाई, न बैंकिंग
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मोबाइल टावर न होने के कारण उनके बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो रही है। इसके अलावा:
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- सरकारी योजनाएं: लोग ऑनलाइन माध्यम से मिलने वाली योजनाओं की जानकारी से वंचित हैं।
- बैंकिंग सेवाएं: डिजिटल लेनदेन और बैंकिंग कार्यों के लिए मीलों दूर जाना पड़ता है।
- स्वास्थ्य सेवाएं: आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस बुलाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
“नेटवर्क की समस्या को गंभीरता से लिया गया है। संबंधित विभागों और टेलीकॉम कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है। जल्द ही इन दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।”
— चंद्रवीर सिंह, एसडीएम सलूणी

प्रशासन से जल्द समाधान की मांग
क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार से मांग की है कि सीमावर्ती और ऊंचाई वाले इन क्षेत्रों में जल्द से जल्द मोबाइल टावर स्थापित किए जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक नेटवर्क नहीं आता, तब तक वे खुद को देश की मुख्यधारा से कटा हुआ महसूस करते रहेंगे।








