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दुर्गम पंचायत गिरड़ पर टूटा दुखों का पहाड़: राख के ढेर में बदली सदियों पुरानी सांस्कृतिक धरोहर।

भरमौर: सदियों पुराना ऐतिहासिक गिरड़ माता मंदिर जलकर राख, क्षेत्र में शोक की लहर

भरमौर (चंबा): जनजातीय क्षेत्र भरमौर की अति दुर्गम पंचायत के गिरड़ गांव से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ स्थित सदियों पुराना ऐतिहासिक गिरड़ माता मंदिर   भीषण आग की भेंट चढ़ गया। देवदार की लकड़ी से निर्मित यह प्राचीन मंदिर देखते ही देखते राख के ढेर में तब्दील हो गया।

देवदार की नक्काशीदार लकड़ी से बना था मंदिर

​बताया जा रहा है कि यह मंदिर पूरी तरह से खालस देवदार की लकड़ी से बना था, जो अपनी बेहतरीन नक्काशी और प्राचीन वास्तुकला के लिए जाना जाता था। लकड़ी के कारण आग ने बेहद कम समय में पूरे मंदिर को अपनी चपेट में ले लिया। जब तक स्थानीय ग्रामीण कुछ समझ पाते और आग बुझाने का प्रयास करते, तब तक मंदिर का ढांचा पूरी तरह जल चुका था।

आग के कारणों पर सस्पेंस

​मंदिर में आग कैसे लगी, इसका खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है। घटना के समय मंदिर परिसर में कोई मौजूद था या नहीं, और आग शॉर्ट सर्किट से लगी या किसी अन्य कारण से, यह अभी जांच का विषय है। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण राहत कार्य में भी काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

विधायक डॉ. जनक राज ने जताया शोक, जांच की मांग की

​भरमौर के विधायक डॉ. जनक राज ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने इसे क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

​”गिरड़ माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हमारी सदियों पुरानी आस्था और इतिहास का प्रतीक था। मंदिर किन परिस्थितियों में जला है, इसकी गहन जांच होनी चाहिए।” — डॉ. जनक राज, विधायक (भरमौर)

  • स्थान: गिरड़ गांव, अति दुर्गम पंचायत, भरमौर।
  • नुकसान: सदियों पुराना लकड़ी का मंदिर पूर्णतः नष्ट।
  • प्रशासनिक मांग: घटना की निष्पक्ष जांच की मांग।
Ami News
Author: Ami News

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