बिक्रम मजीठिया की रिहाई से पंजाब की सियासत गरमाई, सीएम मान को दी ‘मजीठा’ से चुनाव लड़ने की खुली चुनौती

सात महीने के लंबे अंतराल के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने पर जेल से बाहर आए शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जेल की सलाखों से बाहर निकलते ही मजीठिया ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोला और सीधे चुनावी अखाड़े में दो-दो हाथ करने की ललकार दी।

“दम है तो मेरे खिलाफ चुनाव लड़कर दिखाएं सीएम”
मजीठिया ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को उनके गृह क्षेत्र या किसी सुरक्षित सीट के बजाय मजीठा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दी। उन्होंने कहा, “अगर मुख्यमंत्री को अपनी लोकप्रियता और काम पर इतना ही भरोसा है, तो वह मजीठा सीट से मेरे खिलाफ चुनाव लड़ें। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।” राजनीतिक गलियारों में इसे सीधी ‘पॉलिटिकल वॉर’ की शुरुआत माना जा रहा है।
जान को खतरा: सिद्धू मूसेवाला जैसा हादसा होने की आशंका
रिहाई के बाद मजीठिया काफी भावुक नजर आए, लेकिन उनके तेवर बेहद सख्त थे। उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए दावा किया कि सरकार उनकी सुरक्षा में जानबूझकर ढिलाई बरत सकती है। मजीठिया ने एक सनसनीखेज बयान देते हुए कहा, “मेरी जान को खतरा है और आशंका है कि मेरे साथ सिद्धू मूसेवाला जैसा कोई बड़ा हादसा कराया जा सकता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब उन्हें खत्म करने की एक गहरी साजिश का हिस्सा है।
परिवार को प्रताड़ित करने का आरोप
अपनी गिरफ्तारी के दिनों को याद करते हुए मजीठिया ने कहा कि यह केवल उनकी गिरफ्तारी नहीं थी, बल्कि उनके परिवार को मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश थी। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी और बच्चों को बेवजह परेशान किया गया और उनके निष्ठावान समर्थकों पर बदले की भावना से फर्जी मुकदमे लादे गए।

प्रमुख बिंदु: मजीठिया के तीखे प्रहार
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- चुनावी चुनौती: मुख्यमंत्री को मजीठा सीट से चुनाव लड़ने को कहा।
- सुरक्षा पर सवाल: खुद की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और मूसेवाला हत्याकांड का जिक्र किया।
- राजनीतिक प्रतिशोध: आप सरकार पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
- भावुक अपील: गिरफ्तारी के दौरान परिवार को हुई परेशानी पर दुख व्यक्त किया।
विशेष नोट: बिक्रम मजीठिया की यह आक्रामक वापसी आगामी चुनावों से पहले अकाली दल के कार्यकर्ताओं में नया जोश भर सकती है, वहीं आम आदमी पार्टी के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकती है।








