ऑनलाइन दोस्ती के टूटने पर 15 वर्षीय किशोर ने दी जान: कुल्लू के भुंतर में दहला देने वाली घटना

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले से एक अत्यंत हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहाँ मात्र 15 वर्ष की आयु के एक किशोर ने मौत को गले लगा लिया। भुंतर की वर्कशॉप कॉलोनी में रहने वाले 10वीं कक्षा के छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। प्रारंभिक जांच में इस आत्मघाती कदम के पीछे ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया के जरिए हुई विदेशी दोस्ती में आया तनाव बताया जा रहा है।
इंडोनेशियाई दोस्त से संपर्क टूटने पर था तनाव में
मृतक की पहचान कौशिक राय के रूप में हुई है, जो मूल रूप से जलपाईगुड़ी (पश्चिम बंगाल) का निवासी था। मिली जानकारी के अनुसार, कौशिक भुंतर में अपनी बहन के साथ किराए के कमरे में रहकर पढ़ाई कर रहा था। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि कौशिक ऑनलाइन गेम खेलने का शौकीन था। गेमिंग के दौरान ही उसकी दोस्ती इंडोनेशिया की रहने वाली ‘युकी’ नाम की एक लड़की से हुई थी।
दोनों इंस्टाग्राम के माध्यम से एक-दूसरे के संपर्क में थे। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से युकी से उसका संपर्क नहीं हो पा रहा था, जिसके कारण वह गहरे मानसिक तनाव में था। इसी तनाव के चलते उसने घर में अकेले होने पर खौफनाक कदम उठा लिया।

परिजनों की अनुपस्थिति में हुई घटना
जिस समय कौशिक ने यह कदम उठाया, उसकी बहन कमरे पर मौजूद नहीं थी। वहीं उसके माता-पिता किसी निजी कार्य से पश्चिम बंगाल गए हुए थे। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
क्या कहती है पुलिस?
एसपी कुल्लू, मदन लाल ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया:
“किशोर ऑनलाइन गेमिंग के जरिए इंडोनेशियाई दोस्त के संपर्क में था। पिछले कुछ दिनों से बातचीत बंद होने के कारण वह परेशान था। पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटा लिए हैं और फॉरेंसिक टीम भी जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों का खुलासा होगा।”

विशेषज्ञों की राय: अभिभावक रखें नजर
इस घटना ने एक बार फिर किशोरों के बीच बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग और वर्चुअल दुनिया की लत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर माता-पिता की निगरानी अत्यंत आवश्यक है।
- संकेत पहचानें: यदि बच्चा अचानक गुमसुम रहने लगे या चिड़चिड़ा हो जाए, तो उससे बात करें।
- स्क्रीन टाइम: बच्चों के मोबाइल और गेमिंग के समय को सीमित करें।
नोट: यदि आप या आपके जानने वाले किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं, तो कृपया सहायता लें। राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबरों या मनोचिकित्सक से संपर्क करें। जीवन अमूल्य है।








