अपहरण की कहानी निकली झूठी: मर्जी से घर से भागे थे धोगड़ी के तीनों बच्चे

जालंधर/आदमपुर : जिला जालंधर के गांव धोगड़ी से गत 25 जनवरी को लापता हुए तीन नाबालिग बच्चों के मामले में उस समय नया मोड़ आया, जब पुलिस की पूछताछ में बच्चों ने खुद कबूल किया कि उनका अपहरण नहीं हुआ था, बल्कि वे अपनी मर्जी से घर छोड़ कर भागे थे।
पतंग उड़ाने के बहाने बनाई थी प्लानिंग
जानकारी के अनुसार, कार्तिक (10) पुत्र दीपक कुमार, वंश (12) पुत्र आकाश नाहर और सैमअल (10) पुत्र विनोद नाहर निवासी गांव धोगड़ी 25 जनवरी को पतंग उड़ाने और लूटने के बहाने घर से निकले थे। असल में उन्होंने पहले से ही घर से भागने की योजना बना रखी थी। भागने के दौरान वे किसी तरह पठानकोट पहुँच गए। वापसी में उन्होंने रास्ते से एक साइकिल उठाई और होशियारपुर के गांव खुड्डा में रुके।
सरपंच की सूझबूझ से खुला राज
गांव खुड्डा के सरपंच हरबंस सिंह और स्थानीय निवासियों ने जब इन बच्चों को अकेले घूमते देख पूछताछ की, तो बच्चों ने पकड़े जाने के डर से ‘अपहरण’ की मनगढ़ंत कहानी सुना दी। इसके बाद तुरंत टांडा पुलिस को सूचित किया गया, जिन्होंने जंडू सिंघा पुलिस चौकी से संपर्क साधा।

पुलिस और माता-पिता की मौजूदगी में कबूला सच
जंडू सिंघा चौकी इंचार्ज ए.एस.आई. कुलदीप सिंह ने गांव खुड्डा पहुँच कर सरपंच और बच्चों के माता-पिता की मौजूदगी में जब कड़ाई से पूछताछ की, तो बच्चों ने सच उगल दिया। उन्होंने माना कि वे किसी निजी कारण से घर से भागे थे और अपहरण जैसी कोई बात नहीं हुई थी।
“बच्चों के माता-पिता ने पहले ही चौकी में उनके लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। गांव खुड्डा के निवासियों और सरपंच ने बच्चों को सुरक्षित रखकर और पुलिस को सूचना देकर बड़ी जिम्मेदारी निभाई है।”
— ए.एस.आई. कुलदीप सिंह, इंचार्ज जंडू सिंघा पुलिस चौकी

भविष्य के लिए दी गई नसीहत
इस अवसर पर ए.एस.आई. कुलदीप सिंह, सरपंच हरबंस सिंह, गुरप्रीत सिंह खालसा और जसविंदर सिंह जस्सी ने बच्चों को प्यार से समझाया और भविष्य में दोबारा ऐसी खतरनाक गलती न करने की प्रेरणा दी। बच्चों के परिजनों ने सरपंच और पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त किया।









