इंजीनियर युवराज मेहता हादसा: आखिरी 96 घंटों का सच बताएगा कार का ‘वाटरप्रूफ रिकॉर्डर’

नोएडा: सेक्टर-150 स्थित निर्माणाधीन मॉल के गहरे बेसमेंट में गिरी ग्रैंड विटारा कार और उसमें जान गंवाने वाले इंजीनियर युवराज मेहता का मामला अब तकनीकी जांच के केंद्र में है। 96 घंटे तक पानी में डूबी रहने के बाद निकाली गई इस कार को फिलहाल सूरजपुर पुलिस लाइन में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है। पुलिस की फोरेंसिक टीम के साथ-साथ अब मारुति कंपनी की टेक्निकल टीम भी इस गुत्थी को सुलझाने में जुट गई है कि हादसे के उन आखिरी पलों में क्या हुआ था।
वॉइस रिकॉर्डर खोल सकता है राज
युवराज के करीबी दोस्त पंकज ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि युवराज की कार अत्याधुनिक उपकरणों से लैस थी, जिसमें तीन कैमरे और एक वाटरप्रूफ वॉइस रिकॉर्डर भी लगा है। पंकज का कहना है, “भले ही कार चार दिन पानी में रही हो, लेकिन हमें भरोसा है कि डैशबोर्ड में लगा वॉइस रिकॉर्डर सुरक्षित होगा। मारुति की टेक्निकल टीम ने भी डाटा रिकवरी की उम्मीद जताई है।”

आखिरी शब्द किसके लिए थे?
हादसे के समय युवराज ने अपनी जान बचाने के लिए कितना संघर्ष किया और उनके मुख से निकले अंतिम शब्द क्या थे? ये सवाल उनके परिवार और दोस्तों को झकझोर रहे हैं। दोस्तों को उम्मीद है कि कार के सनरूफ से लगाई गई मदद की गुहार और केबिन के अंदर की बातचीत इस रिकॉर्डर में कैद हो सकती है। गौरतलब है कि जब कार बाहर निकाली गई, तो उसका सनरूफ खुला हुआ पाया गया था, जिससे यह अंदेशा गहरा गया है कि युवराज ने डूबते वक्त बाहर निकलने की पूरी कोशिश की थी।

पुलिस की जांच के मुख्य बिंदु
पुलिस और फोरेंसिक टीमें फिलहाल निम्नलिखित पहलुओं पर बारीकी से काम कर रही हैं:
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- इम्पैक्ट एंगल: कार किस कोण से और कितनी ऊंचाई से गड्ढे में गिरी?
- तकनीकी स्थिति: हादसे के वक्त कार किस गियर में थी और उसकी अनुमानित स्पीड क्या रही होगी?
- इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य: क्या पानी के दबाव के कारण कार के दरवाजे लॉक हो गए थे?
“हम यह जानने को उत्सुक हैं कि युवराज ने अंतिम समय में किसे याद किया और क्या कोई ऐसी तकनीकी खामी थी जिसने उन्हें बाहर निकलने से रोका। सच सामने आना जरूरी है।” — पंकज, युवराज के मित्र









