हिमाचल के राशन डिपुओं में बड़ा बदलाव: अब फिंगरप्रिंट का झंझट खत्म, चेहरा दिखाकर मिलेगा राशन

हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को अधिक पारदर्शी और हाईटेक बनाने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के 5100 से अधिक राशन डिपुओं में अब उपभोक्ताओं को राशन लेने के लिए मशीनों पर अंगूठा लगाने या ओटीपी का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी। नई व्यवस्था के तहत अब फेस ऑथेंटिकेशन (चेहरा पहचान) और आई-स्कैनिंग (आंखों की स्कैनिंग) के जरिए राशन उपलब्ध कराया जाएगा।
नई अत्याधुनिक POS मशीनें बदलेंगी व्यवस्था
खाद्य आपूर्ति विभाग के अनुसार, वर्तमान में इस्तेमाल हो रही पुरानी पॉस (POS) मशीनों को हटाकर उनकी जगह अत्याधुनिक मशीनें लगाई जा रही हैं। इन नई मशीनों में फिंगरप्रिंट के साथ-साथ फेस और आई-स्कैनर की सुविधा होगी। अक्सर पहाड़ी क्षेत्रों में नेटवर्क की कमी के कारण ओटीपी नहीं आता था या कड़ी मेहनत करने वाले मजदूरों के फिंगरप्रिंट मैच नहीं होते थे; नई तकनीक से इन सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा।

अप्रैल से लागू हो सकती है व्यवस्था
खाद्य आपूर्ति निदेशालय शिमला इस कोशिश में है कि आगामी 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष से इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाए। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि परिवार का कोई भी सदस्य, जिसका नाम राशन कार्ड में दर्ज है, अपना चेहरा स्कैन करवाकर राशन ले सकेगा।

डिजिटल बिल से आएगी पारदर्शिता
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई मशीनों से डिजिटल बिल भी जेनरेट होगा। उपभोक्ता को तुरंत प्रिंटेड रसीद दी जाएगी, जिसमें राशन की मात्रा और दर का स्पष्ट विवरण होगा। इससे डिपो धारकों द्वारा कम राशन देने या अधिक दाम वसूलने जैसी शिकायतों पर लगाम लगेगी।
“प्रदेश के सभी डिपुओं में पुरानी मशीनों को बदलकर नई तकनीक वाली मशीनें देने की प्रक्रिया जारी है। हमारा लक्ष्य राशन वितरण को सरल, सुरक्षित और भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है।”
— आर.के. गौतम, निदेशक, खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले।

- कुल राशन कार्डधारक: 19.60 लाख परिवार।
- कुल राशन डिपो: 5100+ उचित मूल्य की दुकानें।
- मुख्य लाभार्थी: अंत्योदय, बीपीएल, पीएचएच और एपीएल परिवार।
- तैयारी: लाभार्थियों की ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया लगभग पूरी।








