26 नवंबर को संविधान तैयार, तो 26 जनवरी का इंतज़ार क्यों?

नई दिल्ली: भारत का संविधान केवल कानूनों की एक किताब नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। दुनिया के सबसे बड़े लिखित संविधान को बनाने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब 26 नवंबर 1949 को यह पवित्र दस्तावेज बनकर तैयार हो चुका था, तो इसे लागू करने के लिए पूरे दो महीने का समय क्यों लिया गया?
इसके पीछे छिपी है भारतीय स्वाधीनता संग्राम की एक ऐसी कहानी, जिसने देश के इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया।
1929 का वह ऐतिहासिक लाहौर अधिवेशन
संविधान लागू करने की तारीख का संबंध संविधान बनने से 20 साल पहले की एक घटना से जुड़ा है। साल 1929 में लाहौर में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ, जिसकी कमान पंडित जवाहरलाल नेहरू के हाथों में थी। इस अधिवेशन में कांग्रेस ने एक साहसी फैसला लेते हुए ‘डोमिनियन स्टेटस’ (ब्रिटिश सत्ता के अधीन स्वायत्तता) की मांग को ठुकरा दिया और ‘पूर्ण स्वराज’ का संकल्प लिया।

जब 26 जनवरी को मनाया गया पहला ‘स्वतंत्रता दिवस’
लाहौर अधिवेशन में यह तय हुआ कि अब देश पूरी आजादी से कम कुछ भी स्वीकार नहीं करेगा। इसी संकल्प को दोहराने के लिए 26 जनवरी 1930 को पहली बार देशव्यापी स्तर पर ‘स्वतंत्रता दिवस’ मनाया गया। उस दिन हजारों भारतीयों ने तिरंगा फहराया और अंग्रेजों की गुलामी की बेड़ियों को काटने की शपथ ली।
1947 में वास्तविक आजादी मिलने तक, हर साल 26 जनवरी को ही देश के प्रतीकात्मक स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा।

इतिहास को अमर बनाने का फैसला
जब 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ, तो यह तारीख हमारा ‘स्वतंत्रता दिवस’ बन गई। अब संविधान निर्माताओं के सामने चुनौती थी कि 26 जनवरी की उस ऐतिहासिक तिथि के महत्व को कैसे जीवित रखा जाए।
डॉ. बी.आर. अंबेडकर और पंडित नेहरू सहित अन्य विद्वानों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि 26 जनवरी के सम्मान में ही संविधान को इसी दिन लागू किया जाएगा। यही कारण है कि 26 नवंबर 1949 को काम पूरा होने के बावजूद, भारत 26 जनवरी 1950 को आधिकारिक रूप से ‘गणतंत्र’ बना।
“संविधान ने 26 जनवरी की उस तारीख को अमर कर दिया, जिसने दो दशकों तक भारतीयों में आजादी की अलख जगाए रखी थी।”

- संविधान निर्माण की अवधि: 2 साल, 11 महीने, 18 दिन।
- संविधान दिवस: 26 नवंबर (जिस दिन काम पूरा हुआ)।
- गणतंत्र दिवस: 26 जनवरी (जिस दिन लागू हुआ)।
- ऐतिहासिक संदर्भ: 1929 का लाहौर अधिवेशन और 1930 का पूर्ण स्वराज संकल्प।








