ईजी रजिस्ट्रेशन सिस्टम में नया बदलाव बना मुसीबत, सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों में घंटों इंतजार करने को मजबूर हुए लोग

जालंधर/ब्यूरो: सरकार द्वारा ईजी रजिस्ट्रेशन सिस्टम में किया गया नया बदलाव आम जनता के लिए राहत के बजाय आफत बन गया है। नई व्यवस्था लागू होते ही सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में काम की रफ्तार पर जैसे ब्रेक लग गया है। आलम यह है कि जो काम मिनटों में होता था, अब उसमें घंटों लग रहे हैं।
क्या है नया बदलाव और क्यों बढ़ी परेशानी?
नई व्यवस्था के तहत अब सब-रजिस्ट्रार की आईडी पर अगली अप्वाइंटमेंट तब तक दिखाई नहीं देती, जब तक कि वर्तमान केस की पूरी प्रक्रिया (दस्तावेज मिलान, फोटो और प्रिंटिंग) समाप्त नहीं हो जाती। पहले की व्यवस्था में अधिकारी एक केस की प्रोसेसिंग के दौरान ही अगले केस की फाइल देख सकते थे, जिससे काम का ‘फ्लो’ बना रहता था।

ओटीपी (OTP) का नया पेंच:
अब रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए खरीदार और विक्रेता दोनों के आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाता है। जब तक दोनों पक्ष ओटीपी दर्ज नहीं करते, प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती। इसके बाद गवाहों, नंबरदार और अधिकारियों की फोटो व प्रिंट निकलने तक अगला केस सिस्टम पर शो ही नहीं होता। इस ‘सीरियल लॉकिंग’ सिस्टम के कारण एक ही रजिस्ट्री में काफी समय बर्बाद हो रहा है।
वकीलों और जनता में भारी रोष
प्रशासनिक कॉम्प्लेक्स स्थित सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में आज दिन भर गहमागहमी और नाराजगी का माहौल रहा। वकीलों और डीड राइटरों का कहना है कि सरकार को इस प्रणाली को लागू करने से पहले तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं की जांच करनी चाहिए थी।
“ईजी रजिस्ट्रेशन को सिस्टम आसान बनाने के लिए लाया गया था, लेकिन बार-बार के बदलाव इसे जटिल बना रहे हैं। यदि एक केस में तकनीकी दिक्कत आ जाए, तो पूरा दफ्तर ठप्प हो जाता है।” – एक स्थानीय वकील

ठंड और नई व्यवस्था का डबल अटैक
कड़ाके की ठंड और सिस्टम की सुस्ती ने मिलकर कामकाज को काफी प्रभावित किया है। जहां पहले रोजाना 100 से अधिक अप्वाइंटमेंट होती थीं, वहीं आज संख्या में भारी गिरावट देखी गई:
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कार्यालय |
कुल अप्वाइंटमेंट |
निष्पादित दस्तावेज |
|---|---|---|
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सब-रजिस्ट्रार-1 |
54 |
51 |
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सब-रजिस्ट्रार-2 |
39 |
39 |
सब-रजिस्ट्रार दमनवीर सिंह और जगतार सिंह ने बताया कि सीमित अप्वाइंटमेंट्स के बावजूद नई प्रक्रिया के कारण काम पूरा करने में अधिक समय लग रहा है।
जनता की मांग: सुरक्षा के साथ सुगमता भी हो
लोगों ने सरकार से मांग की है कि इस सिस्टम की तत्काल समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि पारदर्शिता और सुरक्षा जरूरी है, लेकिन ऐसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए जो आम नागरिक का पूरा दिन बर्बाद कर दे।









